चैत्र नवरात्रि का पावन उत्सव आज से शुरू, पहले दिन मां शैलपुत्री की करें आराधना, जानें पूजा विधि-मंत्र

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज यानी 19 मार्च, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा. पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है.

नवरात्रि में कलश में क्या-क्या डालना चाहिए
  • कलश में सबसे पहले जल भरिए, थोड़ा सा गंगाजल, हल्दी का एक गाठ, सुपारी, दो लौंग और दो इलायची डालिए. साथ में एक सिक्का, थोड़ा सा अक्षत और फूल भी डाल सकते हैं. इसके बाद आप पांच या सात आम के पत्ते या अशोक के पत्ते रख सकते हैं.
  • इसके बाद कलश के ऊपर एक दियली रखिए और उसमें चावल भरिए. फिर नारियल को लाल कपड़े में अच्छे से बांधकर कलश के ऊपर रखें. इस पूरी प्रक्रिया के बाद कलश को माता के चरणों में समर्पित करें.
  • बता दें कि चैत्र नवरात्रि 2026 में महाअष्टमी 26 मार्च (गुरुवार) और रामनवमी 27 मार्च (शुक्रवार) को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जाएगा.
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनें.
  • व्रत का संकल्प लें और घटस्थापना के लिए ईशान कोण को अच्छी तरह साफ करें.
  • कलश स्थापना करें. कलश में सिक्का, सुपारी, चावल डालें और कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखकर उसपर नारियल रखें. नारियल पर लाल कपड़ा लिपटा दें. अब देवी का आवाहन करें
  • मां शैलपुत्री का ध्यान करें. माता को रोली, मौली, हल्दी, चावल, फूल, फल, मिठाई अर्पित करें.
  • चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गाय के शुद्ध देसी घी से बनी मिठाई का भोग लगाएं.
  • माता के मंत्र का जाप करें – वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.
  • वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
  • देवी की कथा पढ़ने के बाद आरती करें फिर ध्यान मंत्र बोलें – या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • शाम को पुनः आरती करें और भोग लगाएं.

भक्‍त चैत्र नवरात्रि में इन नियमों का जरूर करें पालन

  • चैत्र नवरात्रि की पूजा के लिए लाल रंग का ऊनी आसन प्रयोग में लाएं और भूलकर भी पूजा में बैठने के लिए दूसरे का आसन या जप के लिए अन्य व्यक्ति की माला का प्रयोग न करें. 
  • नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा एवं व्रत करने वाले साधक को पूरे 09 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. 
  • यदि आप चैत्र नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं तो भूलकर भी नवरात्रि में तामसिक चीजें जैसे लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि का प्रयोग न करें. 
  • नवरात्रि का व्रत और देवी का पूजन करने वाले साधक को किसी के प्रति बुरा भाव अपने मन में नहीं लाना चाहिए. 
  • नवरात्रि व्रत की पूजा या फिर इसका व्रत अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए. यदि किसी कारणवश पूजा या देवी का पाठ छूट जाए तो दूसरे दिन दो बार करके उसे पूरा करने का प्रयास करना चाहिए. 
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
  • जीवन में स्थिरता और आत्मबल मिलता है
  • मूलाधार चक्र (यह शारीरिक शक्ति, जीवन रक्षा (भोजन, आश्रय) और स्थिरता से संबंधित है) मजबूत होता है
  • रोग और भय दूर होते हैं
  • सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है.
शैलपुत्री का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व

पर्वतराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है. वृषभ पर विराजमान इस माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित हैं. नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहीं से योग साधना का आरंभ होता है, जो साधक के जीवन में स्थिरता और संतुलन स्थापित करता है.

इसे भी पढ़ें:-चैत्र नवरात्रि में जरूर करें इनका जाप, सुख-समृद्धि और शत्रुओं पर विजय दिलाएंगे माता रानी के ये शक्तिशाली मंत्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *