Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्रीशिवमहापुराण में भगवान् शिव के नाम की बड़ी भारी महिमा का वर्णन किया गया है। पापी से पापी व्यक्ति भी अपने जीवन में उतना पाप नहीं कर सकता, जितना एक भगवान का नाम समाप्त करने की सामर्थ रखता है।
श्रीशिवमहापुराण में भगवान व्यास शिव नाम की महिमा बताते हुए कहते हैं कि धरती पर उतने पाप ही नहीं है जितना एक भगवान का नाम समाप्त करने की सामर्थ्य रखता है। पापी से पापी व्यक्ति भी जीवन में पाप न करने का संकल्प कर ले और भगवान का स्मरण करे तो उसके कल्याण में कोई संदेह नहीं है।
भगवान शिव को भस्म चढ़ाने की बहुत महिमा है और भगवान की चढ़ी हुई भस्म को मस्तक पर तिलक के रूप में लगाने की भी महिमा है। भस्म मस्तक,कंठ, दोनों भुजा और हृदय पर लगाने का विधान है। पांच स्थान पर भस्म धारण करना चाहिए। भस्म शिव को चढ़ाने से और शिव की चढ़ी हुई भस्मी प्रसादी रूप में अपने मस्तक पर लगाने से भगवान हमारे सारे अशुभ को भस्म कर देते हैं और जीव का मंगल होता है।
श्रीशिवमहापुराण में रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के नेत्र से बताई गई है। कहते हैं एक बार समस्त देवता भगवान से प्रार्थना करते हैं कि- हे महादेव संसार बहुत रूग्ण हो गया है। लोग बीमार रहते हैं, आप सबको श्रेष्ठ स्वास्थ्य प्रदान करें, तपस्या करते हुए शिवजी के नेत्र से एक बूंद अश्रु धरती पर गिरा जिससे रुद्राक्ष नाम का पौधा उत्पन्न हुआ। रूद्र नाम भगवान शिव का है, अक्ष नेत्र को कहते हैं। श्रीशिव के नेत्र से प्रकट हुआ इसलिए नाम पड़ा रुद्राक्ष। रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव सदैव साथ में रहते हैं, रुद्राक्ष धारण करने वाले को कोई अलाय,बलाय,नजर,टोना-टटका नहीं लगता, सर्व विधि मंगल होता है।
सृष्टिखण्ड के प्रारम्भ में भगवती पार्वती की प्रसन्नता के लिए भगवान शिव, शिवलोक से काशी को लाकर धरा धाम पर स्थापित किये। श्रीशिवमहापुराण में काशीपुरी की बहुत महिमा का वर्णन किया गया है। काशीपुरी का एक नाम अविमुक्त क्षेत्र है। इसका अर्थ होता है एक क्षण के लिए भी शिव पार्वती काशीपुरी का त्याग नहीं करते, काशीपुरी में भगवान विश्वनाथ प्रत्यक्ष रूप से विराज रहे हैं। यह संपूर्ण सृष्टि भगवान शिव से प्रगट हुई है।
गुणनिधि ही शिव मंदिर में प्रकाश करने से अरिन्दम नाम के राजा का पुत्र बना और वही अरिन्दम शिव मंदिरों में दीपदान करने के बदले कुबेर पद पर प्रतिष्ठित हुआ। कुबेर की प्रार्थना पर भगवान शिव कैलाश वासी बने। कल की कथा में नवधाभक्ति, मां सती का मंगलमय चरित और भगवती पार्वती के प्राकट्य की कथा होगी।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).