Health tips: आजकल ज्यादातर लोग स्वाइन फ्लू से डरे हुए हैं क्योंकि यह देशभर में बहुत तेजी से फैल रहा है. स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ी बीमारी है, जो इन्फ्लुएंजा A (H1N1) वायरस की वजह से होती है. स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं. इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं. हालांकि हर मरीज को बुखार हो ऐसा जरूरी नहीं है.
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो उससे शरीर में मौजूद वायरस के छोटे – छोटे कण हवा में पहुंच जाते हैं. अगर आसपास मौजूद व्यक्ति इन्हें सांस के साथ अंदर ले सकता है. इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने के बाद अगर किसी व्यक्ति ने अपनी नाक या मुंह छू लिया है तो भी इंफेक्शन के फैलने की आशंका होती है.
स्वाइन फ्लू से लड़ने के आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपाय
- गिलोय- आयुर्वेद में बुखार आने पर गिलोय का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. गिलोय का इस्तेमाल इम्युनिटी बढ़ाने के लिए किया जाता है. जिससे शरीर बीमारियों से लड़ पाता है.
- तुलसी- फ्लू होने पर गले और सांस से जुड़ी तकलीफ होती है. इसमें आप तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं. तुलसी का सेवन करने से गले की परेशानी दूर होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
- हल्दी- इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं और इसे सूजन कम करने वाली डाइट का हिस्सा माना जाता है. हल्दी का सेवन शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है.
- अदरक- इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं. इसे गले की परेशानी और पाचन के लिए भी पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है.
- इसके अलावा हल्दी, अदरक, लहसुन और विटामिन-C से भरपूर खट्टे फलों को भी डाइट में शामिल करना चाहिए. इस मौसम में गुनगुने पानी का सेवन करें.
दिनचर्या और अन्य प्राकृतिक उपाय
- भाप- बंद नाक और गले के दर्द से राहत पाने के लिए सादे पानी की या उसमें थोड़ा सा पुदीना/अजवाइन डालकर भाप लें.
- गर्म पानी और गरारे- पूरे दिन केवल गुनगुना या गर्म पानी ही पिएं. हल्के गर्म पानी में सेंधा नमक और हल्दी मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे (Gargle) करें.
- कपूर और इलायची- कपूर और छोटी इलायची को एक रुमाल में बांधकर सूंघने से सांस लेने का रास्ता साफ रहता है.
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