नहाए-खाय के साथ शुरु हुआ जीवित्पुत्रिका का व्रत, जानें पारण का समय

Religion: हिन्दू धर्म में प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतानों की लंबी उम्र के लिए 24 घंटे तक निर्जल व्रत रहती हैं। इस व्रत में एक गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। संतान की रक्षा के साथ-साथ यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना के लिए भी रखा जाता है। पंचांग के मुताबिक इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा।

जितिया व्रत विधि

जितिया व्रत एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि से ही शुरू हो जाता है और सप्तमी तिथि के दिन महिलाएं पवित्र नदी में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद सात्विक और हल्का भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन विशेष रूप से नोनी का साग, नेनुआ की सब्जी और मडुआ की रोटी जैसे व्यंजन बनते हैं। फिर अष्टमी तिथि पर यानी व्रत के मुख्य दिन पर निर्जला उपवास रखा जाता है।  इस दिन महिलाएं अपने घर के पूजा स्थान के पास भगवान गणेश, जीमूतवाहन देवता, चील और सियारिन का चित्र स्थापित करके उनकी विधिवत पूजा करती हैं। पूजा के समय ही जीमूतवाहन और चील-सियारन की कथा भी सुनी जाती है।

इस दिन अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है।

फिर व्रत के तीसरे दिन यानी नवमी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रती जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं। इसके साथ ही पारण के समय में मडुआ की रोटी, नोनी का साग और अन्य सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि पारण से पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर कुछ न कुछ दान अवश्य करें। फिर अपना व्रत खोल लें। 

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