Puskar: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि पितरों का महापर्व दसवां दिवस÷ प्रथम श्रेणी के पितर होते हैं, जिनका नाम सोमपीथी है। द्वितीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका नाम होता है बर्हिखद और जो तृतीय श्रेणी के पितर होते हैं, उनका नाम होता है अग्निकपात। मतलब जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में सोमयज्ञ करके देवताओं को सोमरस का पान कराया और देवताओं के उच्छिष्ट सोमरस प्रसाद को जिसने पिया,मरने के बाद जब वो पितृलोक जाता है, तब वो सर्वोत्तम पितर बनता है। उसको सोमपीथी कहते हैं।और जिसने सोमयज्ञ नहीं किया, छोटे-मोटे यज्ञ किया, तिल से, जव से, घृत से, पूड़ी से, पकवान से आहुति किया, वो मरने के बाद जब पितर बनता है, तब बहिर्खद नाम का पितर बनता है।जिसने जीवन में कोई यज्ञ नहीं किया, वह मरने के बाद जब पितर बनता है, तब उसका नाम होता है अग्निकपात। अग्निकपात का मतलब? इसने अग्नि को कुछ नहीं दिया, मरने के बाद केवल अपने शरीर की आहुति दी। मरने के बाद अग्नि में जलाया गया। जीवन भर इसने अग्नि देवता को कोई आहुति नहीं दी। वो पितर जो होते हैं, वो तृतीय श्रेणी के होते हैं। उनको अग्निकपात कहते हैं।
सोमरस के विषय में शास्त्रों में वर्णन है, सोम एक पवित्र लता है। सोमरस परम पवित्र अमृत को कहते हैं। उस पवित्र रस से यज्ञ होता है जो परम पवित्र माना जाता है। सोमरस लोगों ने मदिरा के साथ लगा दिया लेकिन शास्त्रों में मदिरा दैत्य पान करते हैं, जिसको सुरा कहते हैं। सोमयज्ञ होता है। देवताओं को सोमरस अर्थात् अमृत भाग मिलता है। वो परम पवित्र होता है।पृथु के यज्ञ में देवताओं ने गौ रूप धारण करने वाली धरती से इन्द्र को बछड़ा बनाकर सोने के पात्र में सोम अर्थात् अमृत का दोहन किया। इसके बाद दैत्यों का नम्बर आया उन्होंने गौ माता का रूप धारण करने वाली भू देवी से प्रहलाद को बछड़ा बनाकर लोहे के पात्र में सुरा का दोहन किया। दैत्यों ने जो दोहन किया उसका नाम सुरा, देवताओं ने जो दोहन किया उसका नाम सोम है। दैत्यों का प्रिय पदार्थ सुरा है और देवताओं का पेय पदार्थ सोमरस है। दोनों में बहुत अन्तर है। फिर पितरों का नम्बर आता है। पितरों ने अर्यमा को वत्स बना करके कमल रूपी पात्र में कव्य का दोहन किया।कव्य माने पिण्ड जो पितरों को दिया जाता है। उसको कव्य कहते हैं। पितरों की प्रसन्नता पिण्ड, श्राद्ध, तर्पण से होती है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).