नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र और आरती

Religion: आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं और उनके नाम में ही उनकी शक्तियों का वर्णन मिलता है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली शक्ति को हम बार-बार नमन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि उनकी विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। जानिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, आरती और मंत्र।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र 

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में हल्के या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। माता की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और माता को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और चंदन अर्पित करें। इसके बाद मां को सफेद रंग के फूल चढ़ाएं। साथ ही गन्ने के रस, मिश्री और शक्कर का भोग लगाएं। माता के ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। अंत में मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥

ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥

ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सरल संसारा॥

जय गायत्री वेद की माता। जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥

कमी कोई रहने ना पाये। कोई भी दुख सहने न पाये॥

उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने॥

रद्रक्षा की माला ले कर। जपे जो मन्त्र श्रद्धा दे कर॥

आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुँचाना॥

ब्रह्मचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम॥

भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी॥

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