New Delhi: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के बर्लिन में भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं से बातचीत की। इस दौरान उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अब जर्मन कंपनियों के लिए सिर्फ सामान बेचने का बाजार नहीं रह गया है। उन्होंने आगे कहा कि जर्मनी भारत को मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और नई तकनीक विकसित करने के बड़े केंद्र के रूप में देख रहा है। जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा मिलकर दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
विदेशों में काम कर रहे भारतीयों को वापस लाने की तैयारी
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को देश लौटने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार उद्योग जगत, विश्वविद्यालयों और प्रमुख शोध संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगी। कोशिश होगी कि भारत में ऐसा माहौल तैयार किया जाए, जहां प्रतिभाशाली लोगों को अपने काम को आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर मिलें।
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारतीय शोधकर्ताओं से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि वे देश लौटने के लिए किन सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मुताबिक, प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करने के लिए केवल अच्छा वेतन देना काफी नहीं है। बेहतर प्रयोगशालाएं, आधुनिक उपकरण, शोध के लिए जरूरी संसाधन और उद्योगों से जुड़कर काम करने के मौके भी उतने ही जरूरी हैं।
भारत के पास तकनीक में आगे बढ़ने का मौका
उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि भारत की युवा आबादी, कुशल पेशेवर और वैज्ञानिक प्रतिभा देश को कई तकनीकी क्षेत्रों में आगे ले जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उद्योग और शोध संस्थान मिलकर नई तकनीक विकसित करें और उसे बाजार तक पहुंचाएं। उन्होंने पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, बैटरी, लॉजिस्टिक्स और कृषि को सहयोग के अहम क्षेत्र बताया।