Vande Mataram: आज 26 जनवरी को पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस मौके पर स्कूल और घरों में देशभक्ति का माहौल होता है. बच्चे और बड़े सभी देशभक्ति के गीत गुनगुना रहे हैं. गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराने के बाद पहले राष्ट्रगान और फिर राष्ट्र गीत गाने का नियम है. अगर आप भी राष्ट्रगीत को गुनगुनाना चाहते हैं तो हम आपके लिए वंदे मातरम् के लिरिक्स लेकर आए हैं. वंदे मातरम् के लिरिक्स को पढ़कर आप राष्ट्रगीत गा सकते हैं और याद कर सकते हैं.
वंदे मातरम् के लिरिक्स
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥
कोटि कोटि कण्ठ कल कल निनाद कराले
द्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥
वंदे मातरम्!
तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्॥
वंदे मातरम्!
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥
वंदे मातरम्!
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्॥
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम
भारत का राष्ट्र गीत वंदे मातरम है. कवि और उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम लिखा था. बंगाल के कांतल पाडा नाम के गांव में 7 नवंबर 1876 को वंदे मातरम गीत की रचना की गई थी. पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में वंदे मातरम गाया गया था. यानी भारत को आजादी मिलने से करीब 51 साल पहले. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत ने बड़ी भूमिका निभाई थी. लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित करने का काम किया था.
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