Religion: सूर्य देव पूजा सनातन धर्म की सदियों से चली आ रही परंपरा है। जिसका पालन आज भी किया जाता रहा है। धार्मिक मान्यातओं के अनुसार भगवान भास्कर को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है और सूर्योदय के समय उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। बता दे कि सूर्य देव को अर्घ्य देने शुभ फलों की प्राप्ती होती है। वही ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, यश, कीर्ति और पद-प्रतिष्ठा का कारक बताया गया है। ऐसे में सूर्य पूजा को जीवन में सकारात्मक बदलाव और सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
सूर्य को अर्घ्य देने से बढ़ती है यश और प्रतिष्ठा
ज्योतिषी शास्त्र के अनुसार, नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा मिल सकती है। सूर्य देव को अर्घ्य देने से साधक की कीर्ति बढ़ने और कार्यक्षेत्र में पहचान मिलती है। इसके अलावा करियर में तरक्की और सरकारा कामों में सहयोग मिलने के भी योग बनते हैं।
धन और संतान का सुख
सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा को धन-धान्य और संतान सुख से भी जोड़ा गया है। धार्मिक मान्यता यह है कि सूर्य देव की नियमित पूजा से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने लक्ष्य की ओर बेहतर तरीके से आगे बढ़ पाता है।
सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि
रविवार या प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके लिए एक साफ लोटे में शुद्ध जल में लाल चंदन या रोली, लाल फूल डालें। थोड़ा गुड़ और गेहूं के कुछ दाने भी डाल सकते हैं। दोनों हाथों से लोटा पकड़कर ओम सूर्याय नमः या ओम घृणि सूर्याय नमः के मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें।
जल अर्पित करने वाले पात्र का महत्व
सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे का बर्तन सबसे शुभ माना जाता है। तांबा सूर्य देव की प्रिय धातु मानी गई है। अगर तांबे का लोटा उपलब्ध न हो तो पीतल का बर्तन भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन से सूर्य को जल अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता है।