कन्या पूजन के समय इन बातों का रखें ध्यान,  माता रानी की बरसेगी असीम कृपा

Religion: नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में छोटी-छोटी बच्चियों को देवी मां का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में कन्याओं को खिलाने से मां दुर्गा की अपार कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही व्यक्ति को धन-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मिलता है। कन्या पूजन को कंजक पूजा भी कहा जाता है। कन्या पूजन नवरात्रि के 9 दिनों में किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन अधिकतर लोग महाअष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। इसी दिन भक्तगण छोटी-छोटी कन्याओं को अपने घर लाते हैं और पूजन के बाद उन्हें खीर-पूड़ी, चना और हलवा का प्रसाद खिलाते है।

कन्या पूजन के जरूरी नियम

बता दें कि कन्या पूजन में 9 कन्याएं मां दुर्गा के नौ स्वरूप होती हैं। लेकिन 9 कन्याएं नहीं मिल पा रही हैं तो आप 3, 5 या 7 कन्याओं के साथ भी कन्या पूजन कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कन्या पूजन के साथ एक छोटे बालक को भी रखें,  जिसे बटुक भैरव या लांगूरा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि बिना बटुक के कन्या पूजन अधूरा रहता है।

कन्या पूजन की विधि

कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले अपने हाथों से उनके पैरों को साफ पानी से धोएं और स्वच्छ कपड़े से पोंछें। इसके बाद सभी कन्याओं को साफ-सुथरे आसन पर बैठाएं, फिर सभी कन्याओं के पैरों में आलता लगाएं और रोली, अक्षत से तिल करें। इसके साथ ही कन्याओं को लाल चुनरी ओढ़ाएं या माथे पर बांधें। इसके बाद कन्या पूजन करने वाली जगह को पहले से साफ कर के उसे शुद्ध कर लें। वहीं कन्याओं को खिलाने वाला भोजन पूरी तरह सात्विक रखें। इसमे प्याज-लहसुन भूलकर भी न डालें।

कन्याओं को खिलाने वाला भोजन- कन्याओं को खिलाने के लिए सूजी का हलवा, काले चने, खीर और पूड़ी उत्तम माना जाता है। लेकिन आप चाहे तो आलू या छोले की सब्जी भी रख सकते हैं बस इसमें प्याज-लहसुन न हो।

इसके बाद कन्याओं और भैरव को भोजन कराने के बाद उन्हें अपनी क्षमतानुसार दक्षिणा और उपहार जरूर दें। फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण देकर विदाई दें। कन्या पूजन से पहले देवी मां को बनाए गए भोजन का भोग लगाएं उसके बाद कन्या खिलाना आरंभ करें।

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