Murudeshwar Temple: देशभर में भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर हैं, जो किसी रहस्य या फिर अन्य कारण से अधिक प्रसिद्ध हैं. इन्हीं मंदिरों में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में अरब सागर के तट पर स्थित मुरुदेश्वर मंदिर रामायण काल की पौराणिक कथाओं से जुड़ा है. यह शिव मंदिर कंदुका पहाड़ी पर स्थित है. यहां का नजारा आने वाले हर शिव भक्त को मंत्रमुग्ध कर देता है.
इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान और खासियत यह है कि यहां खुले आसमान के नीचे 123 फीट ऊंची भगवान शिव प्रतिमा है. इस महादेव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है, तो उस दौरान भगवान शिव की मूर्ति अद्भुत रूप से चमकती है.
पौराणिक कथा के अनुसार, जब लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. जिससे शिव जी प्रसन्न हुए और उसे आत्मलिंग प्रदान किया और शर्त रखी कि इसे लंका पहुँचने से पहले जमीन पर नहीं रखना है. देवताओं ने चिंतित होकर भगवान गणेश से मदद मांगी. गणेश जी ने एक बालक का रूप धारण किया और रावण को गोकर्ण के पास उलझन में डालकर आत्मलिंग जमीन पर रखवा दिया. क्रोधित होकर रावण ने जब उस लिंग को उखाड़ने का प्रयास किया, तब उसके आवरण का एक टुकड़ा कंदुका पर्वत पर गिरा. इसी ‘मृदेश्वर’ स्थान को बाद में ‘मुरुदेश्वर’ कहा जाने लगा.
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