Taj Mahal: ताजमहल भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है और स्थानीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है. 1600 के दशक में निर्मित इस भव्य स्मारक के आसपास कुछ असाधारण अनुभव होते है. ताजमहल की खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. कहा जाता है कि ताजमहल कुल मिलाकर 42 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें सुंदर बगीचे भी शामिल हैं. ताजमहल का मुख्य गुंबद भी काफी विशाल है. इतिहासकारों के अनुसार, ताजमहल का मुख्य गुंबद बनने के दौरान उसके नीचे एक छोटी गुम्बद का निर्माण कराया गया था. छोटी गुम्बद के ऊपर मसाले और मिट्टी लगाकर उस पर बड़ी गुम्बद बनाई.
ताज महल से जुड़े प्रमुख रहस्य और तथ्य:
- बंद कमरे (Tahkhana): ताजमहल के निचले हिस्से में कई कमरे हैं, जिन्हें शाहजहाँ के समय से बंद कर दिया गया था. कई लोग यहाँ छिपे हुए खजाने या प्राचीन मंदिरों के अवशेष होने का दावा करते हैं.
- टेढ़ी मीनारें: ताजमहल के चारों कोनों पर स्थित मीनारें बाहर की ओर थोड़ी झुकी हुई हैं. यह एक इंजीनियरिंग का कमाल है, ताकि किसी आपदा (जैसे भूकंप) की स्थिति में मीनारें मुख्य मकबरे पर न गिरें.
- प्रकाश के साथ रंग बदलना: ताजमहल दिन में अलग-अलग समय पर अपना रंग बदलता है—सुबह में गुलाबी, शाम को दूधिया सफेद और चाँदनी रात में सुनहरा.
- बिना सीमेंट का निर्माण: उस समय कंक्रीट या सीमेंट के बिना, प्राचीन निर्माण तकनीकों जैसे चूना-पत्थर, पत्थर और लोहे के सहारे इसे खड़ा किया गया था.
- निर्माण का समय और लागत: 1631 से 1653 के बीच, लगभग 22 वर्षों में, मकराना के सफेद संगमरमर से इसका निर्माण हुआ, जिसे बनाने में उस समय के 32 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए.
- युद्ध के समय सुरक्षा: द्वितीय विश्व युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, ताजमहल को हवाई हमलों से बचाने के लिए इसके चारों ओर बांस का घेरा (मचान) बनाकर ढका गया था.
- रंग पीला पड़ना: प्रदूषण (कार्बन कणों) के कारण ताजमहल का रंग धीरे-धीरे पीला-भूरा हो रहा है.
- ताजमहल न केवल अपनी भव्यता, बल्कि इन रहस्यों के कारण भी दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र है.
हिन्दू मंदिर होने का दावा
इतिहासकारों ने अपनी किताब में लिखा है कि ताजमहल के हिन्दू मंदिर होने के कई सबूत मौजूद हैं. सबसे पहले यह कि मुख्य गुम्बद के किरीट पर जो कलश वह हिन्दू मंदिरों की तरह है. यह शिखर कलश आरंभिक1800 ईस्वी तक स्वर्ण का था और अब यह कांसे का बना है. आज भी हिन्दू मंदिरों पर स्वर्ण कलश स्थापित करने की परंपरा है. यह हिन्दू मंदिरों के शिखर पर भी पाया जाता है.
इस कलश पर चंद्रमा बना है. अपने नियोजन के कारण चन्द्रमा एवं कलश की नोक मिलकर एक त्रिशूल का आकार बनाती है, जो कि हिन्दू भगवान शिव का चिह्न है. इसका शिखर एक उलटे रखे कमल से अलंकृत है. यह गुम्बद के किनारों को शिखर पर सम्मिलन देता है.
इतिहास में पढ़ाया जाता है कि ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू और लगभग 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ. अब सोचिए कि जब मुमताज का इंतकाल 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में दफना दिया गया, जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था. यह सब मनगढ़ंत बातें हैं जो अंग्रेज और मुस्लिम इतिहासकारों ने 18वीं सदी में लिखी.
दरअसल 1632 में हिन्दू मंदिर को इस्लामिक लुक देने का कार्य शुरू हुआ. 1649 में इसका मुख्य द्वार बना जिस पर कुरान की आयतें तराशी गईं. इस मुख्य द्वार के ऊपर हिन्दू शैली का छोटे गुम्बद के आकार का मंडप है और अत्यंत भव्य प्रतीत होता है. आस पास मीनारें खड़ी की गई और फिर सामने स्थित फव्वारे को फिर से बनाया गया.
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