Indian railway: भारतीय रेलवे एक बड़े ट्रांसफार्मेशन की ओर बढ़ने जा रही है. अब भारत में भी ट्रेन 250 किमी या इससे भी अधिक की स्पीड से चलने वाली है. इस परियोजना पर अनुसंधान, अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) ने तेजी से काम शुरू कर दिया है. संगठन के डॉयरेक्टर उदय बोरवणकर के मुताबिक भारतीय रेल अब सचमुच ‘बुलेट’ मोड में आने वाली है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ सेमी हाई-स्पीड (वंदे भारत जैसी) ट्रेन नहीं, बल्कि 250 किमी/घंटा स्पीड वाली अगली पीढ़ी की ट्रेन है.
ट्रेनों पर भी काम चल रहा
यह जानकारी आरडीएसओ के महानिदेशक उदय बोरवणकर ने शुक्रवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) व आरडीएसओ की ओर से रेलवे में नवीन प्रौद्योगिकियों पर आयोजित सम्मेलन में दी. बोरवणकर ने बताया कि सेमी हाईस्पीड ट्रेनों पर अनुसंधान के साथ-साथ 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों पर भी काम चल रहा है.
हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल जारी हैं और इसके लिए आधारभूत ढांचा मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ट्रैक स्पीड को 75 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है और अब इसे 200 किमी प्रति घंटा करने का लक्ष्य है.
2000 यात्री क्षमता वाली होंगी बोगी
आरडीएसओ के डॉयरेक्टर उदय बोरवणकर के मुताबिक नई जनरेशन वाली बोगियां भी तैयार हो रही हैं. इनमें हरेक बोगी की यात्री क्षमता 2000 होंगी. इसी के साथ एआई आधारित नाइट पेट्रोलिंग सिस्टम पर काम लगभग पूरा हो गया है. इसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. इससे कर्मचारियों की मुश्किलें कम होंगी और हादसों के कारणों का समय से पहले पता लगाकर उनका निराकरण किया जा सकेगा. इससे रेल हादसों में कमी आएगी.
रेल सुधार की ये भी है योजना
उन्होंने बताया कि रेलवे के सिस्टम में सुधार के लिए उन्नत सिग्नलिंग, बेहतर कम्युनिकेशन और एंटी-कोलिजन सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है. इससे भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे सुरक्षित नेटवर्क में शुमार होगी. उन्होंने बताया कि अगले 2-3 सालों में पटरी पर 200 नई वंदे भारत ट्रेनें उतरेंगी. इसके अलावा 100 अमृत भारत ट्रेनें, 50 नमो भारत (RRTS) ट्रेनें, 17,500 नए जनरल नॉन-एसी कोच भी तैयार होंगे.
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