कूलर के लिए कौन सी जाली है बेस्ट? जो चिलचिलाती गर्मी में देगी ठंडी हवा

Cooler Use Tips: कूलर की जान होते हैं उसके पर्दे. अगर कूलर में पर्दे सही लगे हों तो इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि बाहर तापमान कितना है. अच्छे पर्दों के साथ कूलर चिलचिलाती गर्मी में भी पहाड़ों सी चिल्ड हवा दे सकता है. आज मार्केट में कूलर के लिए दो तरह के पर्दे मिलते हैं एक हनीकॉम्ब स्टाइल में और दूसरे साधारण घास वाले पर्दे. हनीकॉम्ब पर्दे मॉडर्न हैं और अपने मधुमक्खी के छत्ते जैसे डिजाइन के चलते जबरदस्त ठंडक उपलब्ध करवा पाते हैं. वहीं घास वाले पर्दे भले पुराने हों लेकिन कम दाम में 40-45 डिग्री टेम्परेचर में भी कूलर की हवा को भरपूर ठंडा बना सकते हैं.

घास वाली जाली

कुछ साल पहले तक कूलर में केवल यही जाली आती थी. अगर आपके घर में सालों पुराना कूलर पड़ा है तो उसमें यह जाली दिख जाएगी.

फायदे- घास वाली जाली सस्ती होती है. ऐसे में अगर एक सीजन में 1-2 बार ये जाली बदलनी पड़ जाए तो महंगी नहीं पड़ती. इसके अलावा यह तुरंत ठंडक देती है. इसमें कोई खास डिजाइन नहीं होता है और यह जल्दी ही पूरी भीग जाती है, जिससे जल्दी ठंडी हवा मिलने लगती है. 

नुकसान- फायदे के साथ इसके कुछ नुकसान भी हैं. यह जाली टिकाऊ नहीं होती और हर सीजन में इसे बदलने पड़ता है. इन्हें साफ भी नहीं किया जा सकता. इस कारण इनमें मिट्टी फंस जाती और जल्द ही इनकी शेप खराब हो जाती है. अगर यह जाली ज्यादा पतली हो तो लू के कारण जल्दी सूख जाती है, जिससे कूलर की हवा गर्म होने लगती है.

हनीकॉम्ब स्टाइल जाली

आजकल मॉडर्न और कॉम्पैक्ट कूलर में यह जाली देखने को मिलती है. यह जाली सेल्युलोज पेपर से बनी होती है. इसे मधुमक्खी के छत्ते जैसा डिजाइन दिया होता है. इसके कई फायदे हैं.

फायदे- यह घास वाली जाली से ज्यादा मजबूत होती है. इसलिए इन्हें हर सीजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आप कूलर में साफ पानी यूज करते हैं तो यह कई साल तक आराम से चल जाएगी.  खास डिजाइन और मैटेरियल के कारण एक बार भीगने के बाद यह जाली ज्यादा देर तक गीली रहती है, जिससे ज्यादा ठंडक मिलती है.

नुकसान- अगर इसके नुकसान की बात करें तो यह घास वाली जाली की तुलना में महंगी होती है. अगर इसमें खारा पानी यूज किया जाए तो यह जल्दी ब्लॉक हो जाती है. लंबे इस्तेमाल के कारण इसमें बदबू भी आने लगती है, जिससे कूलर की हवा में बैठ पाना मुश्किल हो जाता है. इस जाली को फिट करना भी थोड़ा मुश्किल होता है.

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