Sugarcane farming: हमारे देश में किसान गन्ने को सफेद सोना भी कहते हैं. यह एक ऐसी फसल है जो एक बार लगाने पर किसान को लंबे समय तक मुनाफा देती है. गन्ने की खेती में कई तरह की तकनीक अपना कर भी कम लागत में ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा हासिल किया जा सकता है. वाइड रो स्पेसिंग यानी चौड़ी कतार विधि इन दिनों गन्ने की खेती में काफी चर्चा में है. क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि किसान किस तरह से गन्ने की बुवाई करेंगे तो लाखों की कमाई होगी.
गन्ने की बुवाई का ‘सुपर फार्मूला’
इंटरक्रॉपिंग में सफलता के लिए गन्ने की बुवाई की विधि सबसे अहम भूमिका निभाती है. वैज्ञानिक ट्रेंच मेथड और पिट मेथड को ज्यादा फायदेमंद मानते हैं. ट्रेंच मेथड में करीब 30 सेंटीमीटर चौड़ी और गहरी नालियां बनाई जाती हैं, जिससे फसलों को पर्याप्त जगह मिलती है. इसके साथ ही, आजकल एसटीपी (Sugarcane Transplanting) मेथड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इस तकनीक में पहले नर्सरी तैयार की जाती है और फिर पौधों की रोपाई खेत में की जाती है. इस विधि में गन्ने की लाइनों के बीच 4 से 5 फीट की दूरी रखी जाती है, जिससे इंटरक्रॉप फसलों को पर्याप्त धूप और जगह मिल सके.
गन्ने में सब्जियों की खेती से कम समय में ज्यादा कमाई
गन्ने की बुवाई में लाइन से लाइन की दूरी 90 सेंटीमीटर रखी जाती है और इस खाली स्थान में सब्जी फसलों की बुवाई करके किसान तीन से चार महीनों में प्रति एकड़ 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं. अगर शरदकालीन गन्ने के साथ आलू की इंटरक्रॉपिंग की जाए, तो प्रति एकड़ 8 क्विंटल आलू के बीज की जरूरत होती है. गन्ने के बीच खाली स्थान में दो लाइनों में आलू लगाया जाता है, जिससे प्रति एकड़ 100 क्विंटल आलू की पैदावार हो सकती है.
अगर गन्ने के साथ फूलगोभी की इंटरक्रॉपिंग की जाए, तो प्रति एकड़ 200 ग्राम बीज की जरूरत होती है और गन्ने के बीच खाली स्थान में एक लाइन में फूलगोभी की रोपाई की जाती है. इससे प्रति एकड़ 100 से 110 क्विंटल फूलगोभी की पैदावार हो सकती है. इसी तरह, पत्तागोभी की इंटरक्रॉपिंग के लिए भी 200 ग्राम बीज की जरूरत होती है और गन्ने के बीच एक लाइन में पत्तागोभी की रोपाई की जाती है, जिससे प्रति एकड़ 100 से 110 क्विंटल पत्ता गोभी की पैदावार हो सकती है.
गन्ना में प्याज और लहसुन की खेती से बढ़ाएं आमदनी
इसी तरह, अगर गन्ने के साथ प्याज की इंटरक्रॉपिंग की जाए, तो प्रति एकड़ 3 किलो प्याज के बीज की जरूरत होती है. गन्ने के बीच खाली स्थान में दो लाइनों में प्याज की रोपाई की जाती है, जिससे प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल प्याज की पैदावार प्राप्त की जा सकती है. लहसुन की इंटरक्रॉपिंग के लिए गन्ने के बीच खाली स्थान में तीन लाइनों में लहसुन की बुवाई की जाती है. इसके लिए प्रति एकड़ 180 किलो लहसुन के बीज की जरूरत होती है और इससे प्रति एकड़ 20 से 30 क्विंटल लहसुन का उत्पादन होता है. अगर गन्ने के साथ राजमा की इंटरक्रॉपिंग की जाए, तो प्रति एकड़ 30 किलो बीज की जरूरत होती है. गन्ने के बीच खाली स्थान में दो लाइनों में राजमा की बुवाई की जाती है, जिससे प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल तक राजमा का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
3 महीने में मुनाफा, मिट्टी को भी फायदा
इंटरक्रॉपिंग का फायदा केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. जब किसान गन्ने के साथ मूंग, उड़द या लोबिया जैसी दलहनी फसलें लगाते हैं, तो उनकी जड़ों से मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. फसल कटाई के बाद इनके अवशेषों को खेत में दबा देने से प्रति एकड़ 12 से 15 किलोग्राम नाइट्रोजन की बचत होती है. यह हरी खाद की तरह काम करती है, जिससे गन्ने की पैदावार बढ़ती है और रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है.
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