Rajya Sabha Deputy Chairman: राज्यसभा सांसद हरिवंश राय लगातार तीसरी बार संसद के उच्च सदन में उपसभापति चुन लिए गए हैं. शुक्रवार को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा का डिप्टी चेयरमैन चुना गया. बीते हफ्ते ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा सांसद के लिए मनोनीत किया था. खास बात यह रही कि इस बार भी उनका चयन बिना किसी मुकाबले के हुआ, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया. इस अहम मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव का महत्व और बढ़ गया.
पीएम मोदी ने दी बधाई
राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन चुने जाने पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा- हरिवंश राय को राज्यसभा उपसभापति बने जाने पर मेरी बधाई. मुझे उम्मीद है कि सदन को हरिवंश राय के अनुभव का लाभ मिलेगा. सदन के गरिमा को नई ऊंचाई प्रदान की जाएगी.
पीएम मोदी ने कहा, ” राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना ये अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है.”
पीएम मोदी ने कहा कि ये अपने आप में ये एक अनुभव का सम्मान है. एक सहज कार्यशैली का सम्मान है और एक सहज कार्यशैली की स्वीकृति भी है. हमने सबने हरिवंश राय के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए देखा है.
हरिवंश नारायण सिंह से जुड़ी कुछ अहम जानकारी
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ. उनका पैतृक जुड़ाव सारण के सिताब दियारा गांव से है, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की जन्मस्थली भी है.
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अर्थशास्त्र में एम.ए. और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया. छात्र जीवन में वे जेपी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों से बेहद प्रभावित रहे और 1974 के जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई.
राजनीति में आने से पहले वे एक प्रतिष्ठित पत्रकार और बैंक अधिकारी रहे. उन्होंने मात्र 500 रुपये के वेतन पर पत्रकारिता की शुरुआत की. 1977 में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में करियर शुरू किया और बाद में मुंबई में प्रसिद्ध पत्रिका ‘धर्मयुग’ (1981 तक) के साथ काम किया. 1981 से 1984 के बीच उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया में एक अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दीं.
उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर रांची में एक प्रमुख अखबार के संपादक के रूप में बीता, जहां उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं. इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार के रूप में भी कार्य किया.
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