4 गुना मुनाफे वाली है यह खेती, किसान और जानवर दोनों के लिए फायदेमंद

Sweet Corn Farming Tips: आज के दौर में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अगर किसान थोड़े स्मार्ट तरीके अपनाएं. तो कमाई को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. स्वीट कॉर्न यानी मीठा मक्का इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है. दिखने में यह बिल्कुल साधारण मक्के जैसा ही होता है और इसे उगाने का तरीका भी लगभग वैसा ही है. लेकिन जब बात मुनाफे की आती है. तो यह साधारण मक्के को कोसों पीछे छोड़ देता है.

स्वीट कॉर्न की मांग शहरों के बड़े मॉल्स, पिज्जा आउटलेट्स और सिनेमाघरों में साल भर बनी रहती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है. जिससे किसान साल में कई बार पैदावार ले सकते हैं. अगर आप भी कम मेहनत में अपनी स्वीट इनकम शुरू करना चाहते हैं. तो जान लीजिए सबसे बेस्ट तरीका.

1. कम समय में अधिक उपज

फसल की अवधि: स्वीट कॉर्न की फसल मात्र 75 से 90 दिनों LinkedIn में तैयार हो जाती है. कम समय के कारण किसान साल में 3 से 4 फसलें ले सकते हैं.

तैयारी: इसे रबी और खरीफ दोनों सीजन में उगाया जा सकता है. उपजाऊ दोमट मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम मानी जाती है. 

2. लागत और कमाई का गणित (प्रति एकड़)

लागत: एक एकड़ में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर लगभग ₹30,000 से ₹45,000 LinkedIn का खर्च आता है.

मुनाफा: सही प्रबंधन के साथ किसान प्रति एकड़ ₹1.5 लाख से ₹3.5 लाख LinkedIn तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं.

बाजार भाव: साधारण मक्के की तुलना में स्वीट कॉर्न के एक भुट्टे की कीमत बाजार में ₹15 से ₹25 Medium तक मिल जाती है. 

3. उन्नत किस्में (Seeds Variety)

अधिक पैदावार के लिए अच्छी किस्मों का चुनाव जरूरी है.

शुगर 75 (Sugar 75): यह सबसे लोकप्रिय और मीठी किस्म है.

माधुरी और प्रिया: ये किस्में भी व्यावसायिक खेती के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं.

विंन ऑरेंज (Win Orange): इसकी रंगत और स्वाद बाजार में अच्छी मांग पैदा करता है. 

4. अतिरिक्त आय के स्रोत 

हरा चारा: भुट्टे तोड़ने के बाद बचा हुआ हरा पौधा पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में काम आता है, जिसे बेचकर किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.

सह-फसल: स्वीट कॉर्न के साथ कम समय वाली सब्जियां या दलहन की फसलें उगाकर खेत का दोहरा उपयोग किया जा सकता है. 

5. सरकारी सहायता और सब्सिडी

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरकार ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम’ के तहत बीज किट और कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी दे रही है.

आधुनिक खेती के लिए ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर भी सरकार द्वारा आर्थिक मदद दी जा रही है.

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