No Villages Country: आपको यह सुनकर हैरानी हो सकती है लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश है जहां आपको एक भी गांव नहीं मिलेगा. वह देश है सिंगापुर, इस देश में एक भी गांव नहीं है और यह पूरी तरह से शहरीकृत राष्ट्र है. यह सिटी स्टेट के रूप में काम करता है. ज्यादातर देशों के उलट जहां ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के इलाके होते हैं सिंगापुर एक ऐसी जगह के रूप में विकसित हुआ है जहां जमीन का हर इंच डेवलप्ड और आपस में जुड़ा हुआ है.
क्या है सिंगापुर का इतिहास
सिंगापुर में 1960 तक पारंपरिक रूप से कम्पोंग गांव हुआ करते थे. हालांकि, यहां तेजी से औद्योगिक विकास हुआ. विकास के बीच यहां गांवों की जमीन पर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गई. सिंगापुर में जमीन की कमी पहले से ही है. आज यहां एक विरासत गांव बचा है, जिसे कम्पोंग लोरोंग बुआंगकोक कहा जाता है. यह सिंगापुर का आखिर गांव है.
लैंड रिक्लेमेशन तकनीक का करता है उपयोग
सिंगापुर एक अपने मुख्य द्वीप के अलावा 63 छोटे द्वीपों में बंटा हुआ है. यहां भूमि की कमी है, ऐसे में इस कमी को पूरा करने के लिए सिंगापुर लैंड रिक्लेमेशन तकनीक का उपयोग करता है. इस तकनीक में यह समुद्र को पाटकर जमीन का निर्माण करता है. बीते 66 सालों में इसके क्षेत्रफल में करीब 25 फीसदी की वृद्धि हुई है.
यह है अर्थव्यवस्था का आधार
सिंगापुर की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह बैंकिंग, टूरिज्म और तकनीक पर आधारित है. यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पर्यटन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में यहां पर्यटकों से बड़ी मात्रा में आय होती है.
पहले हुआ करते थे गांव
सिंगापुर आज जैसा आधुनिक और चमचमाता हुआ दिखता है पहले ऐसा नहीं था. 1970 के दशक में यहां 200 से भी ज्यादा गांव हुआ करते थे. इन्हें यहां की स्थानीय भाषा में काम्पोंग कहा जाता था. पहले सिंगापुर में लकड़ी के घर, टीन की छत और कच्चे रास्ते हुआ करते थे. लोग खेती, मछली पकड़ने और पशुपालन पर काफी ज्यादा निर्भर थे. लेकिन 1980 के दशक तक सभी गांव आधुनिक कस्बों में बदल गए. ऐसा इसलिए क्योंकि 1960 के बाद सिंगापुर ने काफी तेजी से तरक्की की. सरकार ने लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए पुराने गांवों को हटाकर बड़ी-बड़ी इमारतें बनाना शुरू किया.
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