Bhojan Vastu Niyam; हमारी भारतीय जीवनशैली में कई ऐसी परंपराएं रही हैं, जो न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती हैं. पहले के समय में परिवार के लोग अक्सर जमीन पर बैठकर खाना खाते थे. पिकनिक हो या घर की रसोई, जमीन पर बैठकर भोजन करना एक सामान्य परंपरा थी. आज भले ही टेबल-कुर्सी का चलन बढ़ गया हो, लेकिन माना जाता है कि जमीन पर बैठकर खाना खाने की आदत शरीर के लिए फायदेमंद हो सकती है. जो व्यक्ति की सेहत, मानसिक स्थिति और घर की सुख-समृद्धि पर असर डालते हैं.
जमीन पर बैठकर भोजन करना क्यों बेहतर
वास्तु और आयुर्वेद में जमीन पर पालथी मारकर बैठकर भोजन करने को सबसे उत्तम तरीका बताया गया है. इसे सुखासन की मुद्रा कहा जाता है. इस तरह बैठकर खाने से शरीर का संतुलन बना रहता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है. साथ ही व्यक्ति का पृथ्वी तत्व से भी सीधा जुड़ाव रहता है. लेकिन कभी भी सीधे जमीन या फर्श पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए. भोजन करते समय सूती, ऊनी या कुशा के आसन का इस्तेमाल करना चाहिए. मान्यता है कि नंगे फर्श पर बैठने से शरीर की सकारात्मक ऊर्जा जमीन में चली जाती है.
डाइनिंग टेबल वास्तु नियम
- डाइनिंग टेबल का आकार चौकोर या आयताकार होना चाहिए. गोल टेबल को ऊर्जा संतुलन के लिए सही नहीं माना जाता.
- डाइनिंग रूम या डाइनिंग टेबल को घर के पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. भोजन करते समय परिवार के सदस्यों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
- डाइनिंग टेबल के सामने दर्पण लगाना चाहिए, जिसमें भोजन दिखाई दे, तो घर में अन्न और धन की वृद्धि होती है. इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
भोजन के लिए कौन-सी दिशा शुभ
पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की दिशा माना जाता है. इस दिशा में मुख करके भोजन करने से पाचन बेहतर रहता है. वहीं, उत्तर दिशा को ज्ञान और धन से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिशा शुभ मानी गई है.
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