Google पर लगी 4.1 लाख करोड़ रुपये की पेनाल्टी, यूरोपीय कोर्ट का बड़ा फैसला

Google Android Antitrust Fine: गूगल को यूरोप में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है. यूरोपीय संघ (EU) की सबसे बड़ी अदालत ने एंड्रॉयड से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में गूगल की अपील खारिज कर दी है. इसके साथ ही कंपनी पर लगाया गया 4.1 अरब यूरो (करीब 4.10 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड जुर्माना बरकरार रहेगा. यह मामला पिछले आठ साल से चल रहा था. 

आखिर पूरा मामला क्या है?
दरअसल, यह विवाद 2018 में शुरू हुआ था, जब यूरोपीय आयोग ने गूगल पर उस समय का सबसे बड़ा एंटी-ट्रस्ट जुर्माना लगाया था. आयोग का आरोप था कि कंपनी ने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने सर्च इंजन और क्रोमा ब्राउजर को बढ़ावा दिया है. साथ ही दूसरी कंपनियों के लिए कंपटीशन करना मुश्किल बना दिया.

गूगल पर क्या आरोप लगाए गए थे?

यूरोपीय आयोग की जांच में गूगल के कामकाज के तरीकों को लेकर तीन बेहद गंभीर और बड़े खुलासे हुए थे:

अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन: गूगल ने स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों (ओईएम) के सामने शर्त रखी थी कि अगर वे अपने फोन में गूगल का प्ले स्टोर चाहते हैं, तो उन्हें गूगल सर्च इंजन और क्रोम ब्राउजर को फोन में पहले से ही इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा.

सीक्रेट पेमेंट का आरोप: कंपनी पर यह भी आरोप लगा कि उसने कुछ चुनिंदा मोबाइल निर्माताओं और नेटवर्क ऑपरेटरों को गुप्त रूप से वित्तीय भुगतान (पैसा) किया, बशर्ते वे अपने डिवाइस में सिर्फ और सिर्फ गूगल सर्च को ही डिफॉल्ट रूप से प्री-इंस्टॉल रखें.

वैकल्पिक वर्शन्स पर पाबंदी: गूगल ने डिवाइस निर्माताओं पर यह कड़ा प्रतिबंध लगा रखा था कि वे बाजार में ऐसे फोन नहीं बेच सकते जो एंड्रॉयड के दूसरे वैकल्पिक वर्शन्स पर चलते हों, जिन्हें गूगल की ओर से आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली थी.

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