15 जुलाई से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ashadha Gupt navratri 2026: गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का बेहद रहस्यमय और प्रभावशाली पर्व माना जाता है.  धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का वास होता है. साथ ही जीवन की बाधाओं, भय और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है. कई श्रद्धालु इस दौरान कन्या पूजन, जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान तथा गौ सेवा जैसे पुण्य कार्य भी करते हैं.

दस महाविद्याओं की होती है आराधना

गुप्त नवरात्रि में मां पार्वती के दस स्वरूपों यानी दस महाविद्याओं की पूजा का महत्व बताया गया है. इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां षोडशी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल है. कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2026: सुबह 5 बजकर 33 मिनट से 10 बजकर 9 मिनट तक

15 जुलाई 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:43 ए एम से 05:26 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:18 पी एम से 07:40 पी एम
  • अमृत काल- 04:00 पी एम से 05:27 पी एम

गुप्त नवरात्रि की पूजन विधि

गुप्त नवरात्र में विशेष साधना के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मां के सामने 9 दिन तक घी का एकमुखी दीपक जलाएं. सुबह और शाम “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे” मंत्र का 108 बार जाप करें और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें. अगर कलश स्थापना की है तो सुबह और शाम मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. दोनों समय आरती करें और मां को लौंग व बताशे का भोग लगाएं. लाल फूल अर्पित करना शुभ माना गया है. इस दौरान देवी को आक, मदार, दूब और तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए. पूरे 9 दिनों तक सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है.

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