Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि नंदोत्सव का वर्णन, पूतना, शकटासुर और तृणावर्त का उद्धार। नामकरण संस्कार, भगवान की अनेक बाल लीला, माखन चोरी, मृदभक्षण लीला, दामोदर लीला का गान किया गया। वृन्दावन लीला में, वकासुर वत्सासुर, और अघासुर का उद्धार। ब्रह्मा जी का मोह, कालिया मान मर्दन, वेणूगीत, चीरहरण, यज्ञ पत्नियों पर कृपा और गोवर्धन पूजा की कथा का गान किया गया।
नंदोत्सव का वर्णन भगवान व्यास ने अठारह मंत्रों में किया है। श्रीमद्भागवत महापुराण में कुल अठारह हजार मंत्र हैं। संतों का कहना है कि नंदोत्सव के अठारह मंत्रों के पाठ से, श्रवण से पूरी भागवत श्रवण करने का पुण्य प्राप्त होता है। भगवान का
उत्सव-महोत्सव मनाने से परमात्मा हम आपके जीवन को महोत्सव बना देते हैं। हर परिवार को वर्ष में आने वाले प्रभु के सभी उत्सव को श्रद्धा से मनाना चाहिए। इससे आपके घर का वातावरण दैवी सम्पदा से युक्त हो जायेगा, परिवार में सुख शान्ति होगी।
भगवान की बाल लीलाओं में माखन चोरी लीला अतिशय प्रसिद्ध है। माखन चोरी लीला का आध्यात्मिक अर्थ है भक्त के मन की चोरी। गोपियां माखन तैयार करती और भगवान से प्रार्थना करती, कि आज आप अपने मित्र मंडल के साथ हमारे घर ही पधारें। जिसकी प्रार्थना में बहुत बल होता, भगवान उसके यहां पधारते थे। भजन साधन करते-करते जब मन मक्खन जैसा सतोगुण सम्पन्न हो जाता है, तब भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि अब हमारे मन की चोरी आप स्वयं करें, ताकि हमारा मन सदैव आपके चरणों में लगा रहे और हमारा कल्याण हो।
गोवर्धन पूजा में भगवान गिरिराज जी को सात दिन एक उंगली पर उठाकर रखे। और बृजवासियों की रक्षा किये। इसमें संकेत यह है कि जो भगवान की पूजा आराधना करता है, परमात्मा सप्ताह के सातों दिन उसकी रक्षा करते हैं।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).