Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और अच्छा माना जाता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और रुद्राभिषेक कराकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर विधि-विधान से किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद देता है. ऐसे में अगर आप भी सावन शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इसके शुभ मुहूर्त और सबसे उत्तम समय के बारे में जान लेना जरूरी है.
सावन शिवरात्रि 2026 कब है?
सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार दिन, शाम या रात्रि किसी भी समय रुद्राभिषेक करा सकते हैं. हालांकि, कुछ विशेष मुहूर्तों में पूजा और अभिषेक करना अधिक शुभ माना जाता है.
सावन शिवरात्रि 2026 के शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:22 AM से 05:05 AM |
| अभिजीत मुहूर्त | 12:00 PM से 12:53 PM |
| विजय मुहूर्त | 02:39 PM से 03:32 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:04 PM से 07:26 PM |
| प्रदोष काल (सबसे शुभ) | 07:05 PM से 09:14 PM |
सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का मुहूर्त 2026
सावन शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर देर रात 01 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। वहीं रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
- प्रथम प्रहर पूजा समय – 11 अगस्त की शाम 07 बजकर 04 मिनट से रात्रि 09 बजकर 45 मिनट तक
- द्वितीय प्रहर पूजा समय – 11 अगस्त की रात 09 बजकर 45 मिनट से 12 अगस्त को 12 बजकर 45 मिनट तक
- तृतीय प्रहर पूजा समय – 12 अगस्त को 12 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 12 अगस्त को 03 बजकर 07 मिनट से प्रातः 05 बजकर 49 मिनट तक
रुद्राभिषेक का सबसे शुभ समय कौन सा है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे श्रेष्ठ माना गया है. यदि संभव हो तो सावन शिवरात्रि के दिन 07:05 PM से 09:14 PM के बीच रुद्राभिषेक कराना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस समय किए गए शिव पूजन का विशेष फल मिलने की मान्यता है.
किन चीजों से कराया जा सकता है रुद्राभिषेक?
रुद्राभिषेक जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत, गन्ने का रस और सरसों के तेल सहित कई पवित्र द्रव्यों से कराया जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु अपनी मनोकामना और परंपरा के अनुसार इन द्रव्यों से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं.
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