प्रभु पदार्थ से नहीं, सद् चिंतन, सद्वाणी और सदाचार से होते हैं प्रसन्न: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि प्रभु पदार्थ से नहीं सद् चिंतन, सद्वाणी और सदाचार से प्रसन्न होते हैं। हम भगवान को पदार्थ तो चढ़ायें लेकिन अपने कर्मों को पवित्र करने का प्रयास न करें, तो परमात्मा खूब नाराज होते हैं। ईश्वर की उपासना के साथ-साथ कर्म शुद्धि बहुत आवश्यक है। इसलिए सद्कार्य करते हुए ईश्वर की आराधना करना चाहिए। इसीलिए संत वाणी में कहा‌ गया है। ” करम खोटे तो ईश्वर के भजन गाने से क्या होगा?”

वंदन में हृदय के भाव जागृत हों, तो ही वह सार्थक बनता है। वंदन करने से प्रभु भक्त के जीवन के समस्त बंधन को छुड़ा देते हैं, संतों ने कहा- वंदन करने से प्रभु भक्त के बंधन में हो जाते हैं। प्रभु को वंदन करना नवधा भक्ति में छठवीं प्रकार की भक्ति है। धर्मशास्त्रों में नित्य मंदिर जाकर भगवान को वंदन करने का बहुत फल बताया गया है। एक बार भगवान को प्रणाम करने से दस अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

दस अश्वमेध यज्ञ करने वाले का पतन हो सकता है लेकिन भगवान को प्रणाम करने वाले का पतन कभी नहीं होता। दस अश्वमेध यज्ञ तो क्या सौ अश्वमेध यज्ञ करने वाले राजा राजा नहुष का पतन हो गया। नहुष की बुद्धि बिगड़ गई, इन्द्र पद प्राप्त करके भी उनको अजगर सर्प का शरीर प्राप्त हुआ। ऋषियों के आशीर्वाद से द्वापर में युधिष्ठिर से संवाद कर उन्हें मुक्ति प्राप्त हुई। श्रीमद्भगवतगीता एवं श्रीमद् वाल्मीकि रामायण दोनों जगह भगवान एक बार भी मंदिर जा करके प्रणाम करने वाले की सदैव रक्षा करने की बात कहते हैं और प्रभु कहते हैं कि यह मेरा व्रत है, संकल्प है, मैं इसका त्याग कभी नहीं कर सकता।

प्रभु को पूंछकर ही सब कार्यों का निर्णय करो। भगवान श्रीमद्भगवद्गीता में कहते हैं कि ईश्वर प्रत्येक प्राणी के हृदय में स्थित है। हृदय में जीव भी विराजमान है और परमात्मा भी विराजमान है। न समझी वाले विचार ही जीव के और पूर्ण समझदारी वाले विचार ही परमात्मा के हैं। जिसे हम मन अथवा आत्मा की आवाज कहते हैं। धर्मशास्त्र उसे जीव और परमात्मा कहते हैं। तो हमेशा परमात्मा से पूंछकर ही निर्णय करो। अन्त:करण ज्ञानमय है। किसी भी कार्य का निर्णय अपने अन्तःकरण से विवेक पूर्वक करो।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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