Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि नाम वंदना प्रकरण में पूज्य गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने इस संसार के करण का भी परम कारण भगवान के श्री राम नाम को बताया है। इस संसार के तीन कारण हैं- अग्नि, सूर्य और चंद्र। अग्नि, सूर्य और चंद्र का कारण भी भगवान का नाम है। भगवान का नाम ब्रह्मा बनकर साधक के जीवन में सद्गुणों को प्रकट करता है, विष्णु बनकर साधक के सद्गुणों को का पालन करता है और शिव शंकर बनकर साधक के दुर्गुणों को समाप्त कर देता है। भगवान के नाम को वेद का प्राण बताया है।
सनातन धर्म का मूल वेद है और वेद का प्राण भगवान का नाम है। भगवान का नाम तीनों गुणों से परे है। अनुपम है, और समस्त गुणों का निधान है। राम नाम का स्मरण करने से, साधक के जीवन में सभी उपलब्धियां प्राप्त हो जाती हैं और जो कुछ अच्छा नहीं है उससे छुटकारा मिल जाता है। श्री रामचरितमानस में नौ दोहे में नाम वंदना का प्रकरण आया है। प्रायः साधक चाहते हैं कि हमारी भगवान् के नाम में रुचि हो, हम अधिक से अधिक भगवान के नाम का जप करें। संतों का अनुभव है श्री रामचरितमानस के नाम बंदना प्रकरण का नित्य पाठ करने से धीरे-धीरे भगवान के नाम में रुचि जागृत हो जाती है।
मानस सर के निरूपण में श्री रामचरितमानस को सरोवर से उपमा दिया गया है और जिसकी तुलना मानसरोवर से किया गया है। किसी भी सरोवर में जब हम स्नान करते हैं तो केवल तन का मैल धुलता है लेकिन श्री रामचरितमानस रूपी सरोवर में जब हम अवगाहन करते हैं अर्थात् पठन-पाठन करते हैं तो तन के साथ-साथ मन का मैल भी घुल जाता है। दूसरे किसी सरोवर में अगर कोई डूब जाय, तो मर जाता है लेकिन रामायण रूपी सरोवर में डूबने वाला मरता नहीं है, अपितु तर जाता है। भारद्वाज याज्ञवल्क्य संवाद में महर्षि भारद्वाज के द्वारा महर्षि याज्ञवल्क्य से श्री राम कथा सम्बन्धी प्रश्न किए गये हैं।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).