ग्लेशियर पिघलने से झीलें बनीं नई चुनौती, मचा सकती हैं बड़ी तबाही

Dangerous lakes: नेपाल में ग्लेशियर और ग्लेशियल झील से जुड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र में मौजूद सैकड़ों ग्लेशियल झीलों को लेकर चिंता बढ़ गई है. जिस तेजी से हिमालय और तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियरों का पैटर्न बदल रहा है और नई झीलें बन रही हैं, उसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है.

हिमालय के इलाकों में बढ़ता पर्यटन और प्रदूषण के चलते भी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. पहाड़ी इलाकों में वाहनों की आवाजाही और मानवीय गतिविधियों से निकलने वाला कार्बन और धूल ग्लेशियरों पर जमा हो जाती है. इससे बर्फ की सतह पर काली परत बनती है. यह काली परत सूर्य की ऊर्जा को अधिक अवशोषित करती है और पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.

करीब 200 ग्लेशियर झीलों की स्टडी में पाया गया कि 9 से 12 ग्लेशियर झीलें खतरनाक स्थिति में हैं. इन झीलों को क्रिटिकल यानी गंभीर खतरे वाली श्रेणी में रखा जा सकता है. ग्लेशियरों के पिघलने के इनका दायरा बढ़ रहा है और जब कभी ये फूटेंगे तो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं. 

हिमाचल की ग्लेशियर से बनी कई झीलों का आकार पिछले एक दशक में 30 से 60 फीसदी तक बढ़ा है. इससे भविष्य में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. नेपाल में आई तबाही भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की वजह से हुई.

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