Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्री राधाष्टमी-भगवान श्रीराधाकृष्ण गोलोक में विराज रहे थे। यह निश्चय हो गया था कि सरकार वृज में श्रीराधा रानी के साथ अवतार लेंगे। तब एक-एक करके सभी महीने भगवान को प्रार्थना किए कि आप हममें अवतार लीजिए। प्रभु ने भाद्र मास का चयन किया। फिर सभी तिथियों ने भगवान से अवतार के लिए प्रार्थना किया। तब प्रभु ने अष्टमी तिथि को चयन किया।
श्रीराधा रानी की तरफ भगवान ने श्रीराधा रानी की तरफ देखा, आपका क्या निर्णय है? तो श्रीराधा रानी ने कहा जो हमारे प्रभु श्रीकृष्ण का निर्णय है, वही हमारा निर्णय है। आप भाद्रमास कृष्णपक्ष अष्टमी को अवतार लेंगे और ठीक पन्द्रह दिन बाद भद्रमास शुक्लपक्ष अष्टमी के दिन भगवती श्री राधा रानी ने अवतार का निर्णय ले लिया।एक तत्व द्विधा ज्योति राधा माधव रूपकं।
तत्वतः भगवान् श्रीराधाकृष्ण एक ही है। हम भक्तों पर कृपा करके एक ही भगवान हमें जगत के माता-पिता के रूप में दर्शन दे रहे हैं। शब्द से अर्थ भिन्न नहीं है, जल से तरंग भिन्न नहीं है। इसी तरह भगवान श्रीराधा कृष्ण भिन्न नहीं है।फूलें कमल सोह सर कैसा। निर्गुन ब्रह्म सगुन भएँ जैसा।। कमलों के फूलने से तालाब कैसी शोभा दे रहा है, जैसे निर्गुण ब्रह्म सगुण होने पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड शोभित होता है।श्री राधा अष्टमी के दिन भगवती श्री राधा रानी के प्राकट्य का पूजन, उत्सव महोत्सव मनाने का शास्त्रों में बहुत विशाल फल बताया गया है।
समस्त व्रत अनुष्ठान करने का जो फल मिलता है, श्रीराधा अष्टमी के दिन पूजा पाठ करने से अनंत गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। और भगवान की कृपा का पात्र बनता है। भगवान की कृपा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उसका भगवान श्री राधा कृष्ण में अनुराग हो जाता है।जब याद किसी की न आये, और हर पल राधे राधे गाये। तब ऐसा समझ लेना,अब हरि से मिलन होगा।।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).