जीवन में भगवान की प्राप्ति की इच्छा जगाने वाला शास्त्र है भागवत: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि एक बार भगवान् श्रीकृष्ण भोजन कर रहे थे, वहां पर एक कीड़े को देखकर भगवान् हंस पड़े, रुक्मिणी ने कारण पूछा, प्रभु ने बताया कि यह 72 बार देवताओं का राजा इन्द्र बन चुका है, फिर भी इसकी सुख भोग-लिप्सा खत्म नहीं हुई। इसीलिए आज नाली का कीड़ा बना हुआ है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह बात हम सब पर घटती है। आज तुम्हें कोठी, कार,डनलप के गद्दे और टीवी सेट मिल गये तो तुम राजा हो गये। तुम्हें भगवान की याद ही नहीं आती, आज मौज कर रहे हो, लेकिन यह मौज 4 दिन की है।

कबिरा दिन दस आपनी, नौबत लियो बजाय।

यह पुरपटन यह गली, बहुरि न दीखे जाय।।

धन यौवन यूं जायेगा,जिमि विधि उड़त कपूर।

नारायण हरि भजन कर, क्यों चाटे जग धूरि।।

यह जग की धूल क्यों चाट रहे हो? यह आंखें चली जायेंगी। आंखें चली गईं, तब टीवी सुख दे सकेगा? कान चले गये, तब क्या संगीत तुम्हें सुख दे सकेगा? दांत निकल गये, तब क्या भुट्टों में आनन्द मिलेगा। पेट ठीक नहीं है, तब रसगुल्ला आनन्द दे सकेगा? कल्पना तो करो, शरीर तुम्हारा जीर्ण-शीर्ण होने वाला है। प्रकृति में रहकर कोई पूर्ण निश्चिन्त हो सकता है? पूर्ण निश्चिन्तता केवल ईश्वर के चरणों में मिलेगी।

दुखिया नानक सब संसार।

सोई सुखिया जिस नाम अधार।।

महारास से पहले गोपियों से भगवान अन्तर्धान हो गये। हमारे जीवन से भी ठाकुर अन्तर्धान हो चुके हैं। हमारी गलतफहमी से, हमारी गुस्ताखी से, वह नाराज हो चुका है। हमारे देहाभिमान के कारण ईश्वर हमसे छूट गया है। माता के गर्भ तक ईश्वर जीव के साथ रहता है लेकिन गर्भ के बाहर छोड़ देता है। गोपियों के सामने भगवान प्रकट तो हुए लेकिन छुप गये। छुपने के बाद भगवान यह देखते हैं कि इन्हें मुझसे मिलने की व्याकुलता जीवन में है कि नहीं। यह गोपी गीत की भूमिका है। जीवन में आपको ईश्वर की जरूरत है कि नहीं, आप कह दोगे कि है। हम कहते हैं कि नहीं है। आप अपने जीवन में ईश्वर की आवश्यकता महसूस नहीं करते, क्योंकि यदि महसूस करते, तब खोजने की कोशिश भी करते और न मिलने पर आप व्याकुल भी होते। आप अपने पुत्र की आवश्यकता महसूस करतेहैं कि यह मेरा स्नेह है, मेरा उत्पन्न किया हुआ है, बुढ़ापे में मेरा सहारा बनेगा। बेटा नाराज होकर चला जाये,और चिट्ठी लिखकर रख जाये कि मैं जा रहा हूं, कभी नहीं आऊंगा। तब मां-बाप चैन से बैठेंगे? रात को सोयेंगे? टीवी देखेंगे? सब कुछ भूल कर उसे ढूंढेंगे, अखबारों में निकलवायेंगे, रोयेंगे, खाना पीना छूट जायेगा, जगह-जगह जाओगे, नाते रिश्तेदारों को पूंछते रहोगे, रोते रहोगे क्योंकि आपके जीवन में पुत्र की आवश्यकता है। आपका ईश्वर आपसे रूठ कर चला गया है। करोड़ों जन्मों से वह आपसे अलग बैठा है, छुपा हुआ है। उसके लिये कभी आपके दिल में पीड़ा हुई? आप कभी रोये हैं? आप कभी उसके लिये तड़पे हैं। भागवत हम आपके जीवन में भगवान की प्राप्ति की इच्छा जगाने वाला शास्त्र है।

श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह में भी इसी का संकेत है। भगवती रुक्मिणी देवी भगवान को पाने का यत्न करती है, प्रार्थना करती है और भगवान उनको प्राप्त होते हैं।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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