Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि एक सिक्के के दो पहलू- जो सुख भोगता है, उसे दुःख भोगना ही पड़ता है। जिसके सिर पर भगवान की जगह अभिमान बैठा है, वह बहुत दुःख पाता है। जो ईश्वर का उपकार भूलता है, वह कभी सुखी नहीं होता। जिसके साथ आप खूब प्रेम का व्यवहार करेंगे, वही आपको रुलाएगा।
कुछ लोग अत्यधिक खाने से दुःखी, तो कुछ खाना न मिलने के कारण दुःखी हैं। कुछ लोगों को अज्ञान दुःख देता है, तो कुछ लोगों को ज्ञान का अभिमान दुःख देता है। आनन्द की खोज में बाहर चक्कर लगाने वाला दुःखी होता है। इन्द्रियों का अपार सुख भोगने वाला, भीतर से तो महान दुःखी होता है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).