विवेक जागृत होने पर विपत्ति भी बन जाती है संपत्ति: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि विवेक से थोड़ा सुख भी भोगना चाहिए और भक्तिमय जीवन यापन करके भगवान को भी प्राप्त करना चाहिए। जिसके जीवन में न कोई संयम है, और न ही प्रभु की भक्ति का कोई नियम, उसका जीवन बेकार है। सावधान हो जाओ, यौवन हमेशा टिकने वाला नहीं है। सत्संग के बिना विवेक जागृत नहीं होता और स्वदोष का भान नहीं होता।

शरीर में चाहे रहो, पर शरीर से अलग हो इस भावना से जियो। मनुष्य चतुर तो है, पर बिना ठोकर लगे सयानापन नहीं आता।

यदि योग्य हो तो नई बात स्वीकार करो, किन्तु पुराने को मत छोड़ो। जिसमें विवेक नहीं है, वे संसार रूपी नदी में डूब मरते हैं। विवेक से संसार के सुखों को ग्रहण करो, भक्ति से भगवान को प्राप्त करो। यदि विवेक जागृत है, तो विपत्ति भी सम्पत्ति बन जाती है।

शरीर, संसार में जो कुछ भी हम सबको प्राप्त है एक दिन छूटेगा। प्राप्त वस्तु को छोड़ना पड़े, इसके पहले उसका उपयोग दूसरों के लिए करो। किसी भी कार्य में सिद्धि मिलने पर तो और अधिक सावधानी और अति संयम आवश्यक है।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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