Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि नगर दर्शन लीला,पुष्प वाटिका प्रसंग, धनुषयज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद, श्री सीताराम विवाह की कथा का गान किया गया। नगर दर्शन लीला में भगवान श्री राम गुरुदेव विश्वामित्र से कहते हैं कि अगर आपकी आज्ञा हो तो हम लक्ष्मण को नगर दिखा करके शीघ्र वापस ले आवें। श्रीलक्ष्मणजी बिना भगवान के नगर देखने के लिए नहीं जाएंगे।
श्रीलक्ष्मणजी शेषावतार हैं। हम सबके सद्गुरु हैं, अपने चरित्र से शिक्षा दे रहे हैं कि हम संसार को देखें लेकिन भगवान के साथ, भगवान को छोड़कर संसार को देखेंगे तो हम माया में पड़ जाएंगे। भगवान के साथ संसार को देखने का तात्पर्य है कि भगवान की पूजा-आराधना, सुमिरन-नाम जप करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करना। वही व्यक्ति इस जीवन में सफल है जो भगवान की आराधना उपासना करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है।
पुष्प वाटिका प्रसंग में प्रभु श्रीसीतारामजी का प्रथम मिलन होता है। श्रीसीताजी माँ की आज्ञा से सखियों के साथ गिरिजा भवानी का पूजन करने गई हैं और प्रभु श्री राम गुरु देव की पूजा के लिये श्रीलक्ष्मणजी के साथ पुष्प लेने गये। रामायण के इस प्रसंग में यह शिक्षा है कि दुनियां का हर कुमार अगर गुरु सेवा में रहे, तो व्यसन और बुराइयों से बचेगा और दुनियां की हर कन्या अगर भगवती की सेवा में रहे तो उसमें दिव्य संस्कार आएंगे जिससे दुनियां में कोई दुःखी नहीं रहेगा।
धनुष यज्ञ प्रसंग में सफलता के चार सूत्र बताए।1- परमार्थिक भावना 2-अपने इष्ट देव का सुमिरण, 3-कार्य कितना भी कठिन हो लेकिन घबराना नहीं (धैर्य) और 4- बड़ों का आशीर्वाद। परशुराम संवाद में स्वधर्म पालन की शिक्षा दी गई। श्री सीताराम विवाह में भगवान से हमारा सम्बन्ध जुड़ें। इसके लिए तीन सूत्र प्रस्तुत किया गया है। प्रथम मन की चंचलता को ईश्वर को सौंप देना, पूर्ण शरणागति और बड़ों की कृपा। एक बार जीव का भगवान से संबंध जुड़ जाए फिर उसे जीवन में कभी अमंगल का मुख नहीं देखना पड़ता।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).