जीवन को नई दिशा देता है मां कूष्मांडा का स्वरूप: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शारदीय नवरात्रि का चौथा दिवस- कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ÷नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप ” मां कुष्मांडा” की पूजा की जाती है। जब सृष्टि में चारों ओर केवल अंधकार था तब इन्होंने अपनी मुस्कान मंद मुस्कान से (ईषत हास्य) से इस ब्रह्माण्ड की रचना की थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि स्वरूपा या आदिशक्ति कहा जाता है।

मां कूष्माण्डा आठ भुजाओं वाली है। इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमण्डल,धनुष,बाण,कमल, अमृत कलश,चक्र,गदा और सभी सिद्धियों व नव निधियों को देने वाली जपमाला है। वाहन सिंह है।इनका निवास सूर्यलोक के भीतर माना जाता है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति केवल इन्हीं के पास है क्योंकि इनका तेज सूर्य के समान देदीप्यमान है।इनकी भक्ति से आयु ,यश,बल और आरोग्य (स्वास्थ्य) में वृद्धि होती है। मां कूष्माण्डा का स्वरूप हम सबको एक सुन्दर संदेश देता है। जीवन में चाहे कितना भी अन्धकार क्यों न हो,हमें आशा और सकारात्मकता का प्रकाश बनाये रखना चाहिए। सृजन,धैर्य औल विश्वास के साथ आगे बढ़ना ही जीवन को नई दिशा देता है।

ब्रह्मा,विष्णु और महेश भी पराम्बा भगवती का स्मरण पूजन और वन्दन करते हैं। एक बार ब्रह्मा जी नारायण जी के पास गये और देखा कि वे किसी का ध्यान कर रहे थे। ब्रह्मा जी ने पूँछा- संसार आपका ध्यान करता है, आप किसका ध्यान करते हैं? नारायण ने कहा मैं पराम्बा, महामाया आदि शक्ति का स्मरण करता हूँ। वहीं से शक्ति पाकर हम संसार का पालन करते हैं, आप विश्व को उत्पन्न करते हैं और शंकर संहार करते हैं। रूद्र को संहार की शक्ति, विष्णु को पालन की शक्ति और ब्रह्मा को सृजन शक्ति पराम्बा भगवती से ही मिलती है। वेदान्तियों के पास ब्रह्म-विद्या के रूप में भगवती का ही स्मरण होता है।भक्त, भक्ति के रूप में शक्ति का ही स्मरण करते हैं। संसार का सारा कार्य शक्ति के द्वारा संचालित है। तार में यदि पावर नहीं है, तब तार का कोई महत्व नहीं है।लाइट,माइक और पंखे सब बन्द हो जाएंगे। बिना पावर के तार शून्य है। इसी प्रकार शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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