Religion: सनातन धर्म में हर साल कन्या संक्रांति के दिन पड़ने वाली विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। बता दें कि सृष्टि के पहले वास्तुकार और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा हैं। हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा पर विशेष रूप से कारखानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा होती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान के साथ पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति और धन की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्ताओं मुताबिक भगवान विश्वकर्मा को ऋग्वेद में ब्रह्मांड के वास्तुकार एवं रचनात्मकता के मूर्त स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। विश्वकर्मा जी ने सृष्टि-सृजन के कार्य में भगवान ब्रह्मा की सहायता करने के लिए संसार के मानचित्र की रचना की थी। धर्मिक ग्रन्थों के अनुसार भगवान कृष्ण के लिये द्वारका नगरी, पांडवों के लिए इन्द्रप्रस्थ के महल, सुदामा जी के लिए सुदामापुरी, सुवर्णमयी लङ्का और देवताओं के स्वर्गलोक का निर्माण विश्वकर्मा जी ने ही किया था। विश्वकर्मा पूजा पर्व को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी मनाया जाता है। आज विश्वकर्मा पूजा के दिन विधिपूर्वक पूजा करने के साथ ही भगवान विश्वकर्मा की आरती जरूर करें।
भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।