Vijaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में विजया एकादशी का खास महत्व है. यह एकादशी शत्रुओं पर विजय दिलाने और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता सुनिश्चित करने वाली मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है, साथ ही साधक को भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है. विजया एकादशी के दिन ये चीजें अर्पित करने से विष्णु जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
विजया एकादशी व्रत की सही तारीख
हिंदू धर्म में फाल्गुन मास में पड़ने वाली जिस विजया एकादशी व्रत को सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना गया है वह व्रत 13 फरवरी 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा और इसका पारण अगले दिन यानि 14 फरवरी 2026, शनिवार की सुबह 06:35 से लेकर 08:52 बजे के बीच होगा.
तुलसी
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है. तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा और भोग दोनों ही अधूरी मानी जाती है. तो श्री हरि को तुलसी दल जरूर चढ़ाएं.
पंचामृत
विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत चढ़ाएं. पंचामृत का भोग लगाने से घर में धन-धान्य में बरकत होती है.
सूखे मेवे
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को सूखे मेवे जरूर चढ़ाएं. सूखे मेवे में बादाम, मूंगफली, अखरोट, काजू और पिस्ता आदि चीजें आती हैं.
फल
विजया एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु जी को मौसमी फलों का भोग लगाएं. फल में केला को जरूर रखें। फल का भोग लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है.
मखाने की खीर
एकादशी के दिन विष्णु जी को मखाने की खीर का भोग लगाएं. मखाने की खीर भगवान विष्णु को अति प्रिय है.
फूल
विजया एकादशी के भगवान विष्णु को कमल, गुलाब, गेंदा के फूल और माला चढ़ाएं. इसके अलावा चंपा, चमेली, पारिजात (हरसिंगार), मालती, कनेर के फूल भी अर्पित कर सकते हैं.
पीला वस्त्र
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र चढ़ाएं. पीला रंग नारायण को अति प्रिय है. इसके अलावा चौकी पर पीले रंग के कपड़े बिछाक हीर भगवान विष्णु की मूर्ति और तस्वीर रखें। फिर पूजा आरंभ करें.
चंदन
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को चंदन प्रिय है. श्री हरि विष्णु को चंदन अर्पित करें. एकादशी के दिन पूजा के समय विष्णु जी को चंदन का तिलक जरूर लगाएं.
विजया एकादशी व्रत की कथा
सनातन परंपरा में जिस एकादशी व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है, उसका संबंध भगवान राम की कथा से जुड़ा हुआ है. हिंदू मान्यता के अनुसार जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम माता सीता को रावण की कैद से छुड़ाने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे तो उस विशाल समुद्र को पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई. लंका विजय में आई इस बाधा को दूर करने का उपाय जानने के लिए तब प्रभु श्री राम वकदालभ्य मुनि के पास गए. तब वकदालभ्य मुनि ने उन्हें एकादशी व्रत को करने कहा. मान्यता है कि तब फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के दिन विधि-विधान से श्री हरि की पूजा से जुड़ा व्रत और पूजन किया. जिसके पुण्य प्रताप से भगवान ने रावण का वध करके लंका पर विजय श्री प्राप्त की.
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