CBSE का थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर बड़ा फैसला, तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी बोर्ड परीक्षा

CBSE Three Language Policy: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपनी थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर एक बड़ा यू-टर्न लिया है. जिसमें मौजूदा बैच के 10वीं के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी. इस फैसले से लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है. बोर्ड ने साफ किया है कि 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे मौजूदा छात्रों को नए नियमों के तहत 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा. यानी इन बैचों के छात्रों की पढ़ाई पहले से तय व्यवस्था के अनुसार ही जारी रहेगी.

जिन छात्रों ने पहले से ही दो विदेशी भाषाएं चुन रखी हैं, वे उन भाषाओं को पढ़ना जारी रखेंगे. हालांकि, इसके साथ ही उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (Indian Language) भी पढ़नी होगी. बोर्ड जल्द ही क्लास के हिसाब से पढ़ाई का आसान मटेरियल जारी करेगा. इसका मकसद भाषा सीखने को मजेदार और दिलचस्प बनाना है ताकि बच्चों का पूरी तरह से विकास हो सके.

बता दें कि CBSE कुछ समय पहले थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) लेकर आया था, जिसे 1 जुलाई 2026 से देशभर के सभी CBSE से जुड़े स्कूलों में लागू किया जाना था. थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत स्टूडेंट्स दो-तीन भाषा पढ़ाई जाती, जिसमें से दो इंडियन लैंग्वेज होना जरूरी था. थ्री लैंग्वेज पॉलिसी उन स्टूडेंट्स पर लागू होगी जो इस साल (2026) में 6ठीं कक्षा में एडमिशन लेंगे.

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