BRICS  समिट में पीएम मोदी ने दिया संदेश, कहा- विविधता हमारी पहचान रहे और सहयोग बने प्रेरणा

New Delhi: नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन पीएम मोदी ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि BRICS की सबसे बड़ी ताकत उसके सदस्य देशों की विविधता और उनके बीच बढ़ता आपसी सहयोग है।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अलग-अलग देशों की अपनी पहचान और परिस्थितियां होने के बावजूद साझा प्रयासों के जरिए वैश्विक विकास को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के कल्याण का माध्यम बने।

PM मोदी ने गिनाईं BRICS की पहल

पीएम मोदी ने BRICS देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए संगठन के तहत की गई विभिन्न पहलों और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रोजगार क्षमता बढ़ाने, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. पीएम मोदी ने बताया कि छोटे और मझोले उद्यमों को ज्ञान, वित्तीय संसाधनों और नए बाजारों से जोड़ने के लिए BRICS MSME कॉर्पोरेशन पोर्टल की पहल की गई है। इसके अलावा, अलग-अलग शहरों के बीच सफल मॉडल और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने के उद्देश्य से ‘BRICS Urban Mobility Hub’ की स्थापना भी की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें BRICS देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

पर्यावरण और विकास पर PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर भारत की सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है और सदियों से देश में यह मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। BRICS के मंच से पीएम मोदी ने कहा कि संगठन के स्तर पर भी मानव विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने इसे सतत विकास यानी सस्टेनेबिलिटी की बुनियाद बताते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में BRICS के तहत कई अहम पहलों पर काम हुआ है और आगे भी पर्यावरण के साथ विकास को संतुलित रखते हुए सहयोग को बढ़ाने की जरूरत है।

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