Telecom News India: भारत अगली पीढ़ी की दूरसंचार सेवाओं यानी 6जी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में 600 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है, जिसे हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं के लिए बेहद अहम माना जाता है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी.
डेटा खपत बढ़ने से बढ़ी जरूरत
एनडीटीवी प्रॉफिट के अनुसार, उन्होंने बताया कि यह कदम देश में तेजी से बढ़ रही डेटा खपत को देखते हुए उठाया गया है. इसका उद्देश्य स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाना और नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना है, ताकि आने वाले समय में बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा किया जा सके.
स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के सुझाव
लाहोटी ने बताया कि नियामक ने स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे सुझाव भी दिए हैं. इससे कंपनियां उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा
नियामक ने टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा है. इसके तहत सरकार द्वारा बनाई गई सुविधाओं को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी. इससे लागत कम होगी और नेटवर्क विस्तार में तेजी आएगी.
निजी 5जी नेटवर्क के लिए गाइडलाइन
नियामक ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क के लिए भी गाइडलाइन जारी की है, जिससे कंपनियां अपने निजी 5जी नेटवर्क बना सकें. हालांकि, लाहोटी ने कहा कि यह क्षेत्र अभी उतना सफल नहीं हुआ है और इसे आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत है.
एआई के कारण बढ़ेगी डेटा की मांग
उन्होंने कहा कि सिर्फ मोबाइल नेटवर्क भविष्य की डेटा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, खासकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. इससे साफ है कि आने वाले समय में नेटवर्क ढांचे को और मजबूत करना जरूरी होगा.
फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में रिकॉर्ड बढ़त
लाहोटी ने बताया कि 2025-26 में भारत में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, जो एक रिकॉर्ड है. यह आंकड़ा देश में इंटरनेट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है.
फाइबर और वायरलेस का मिश्रित मॉडल जरूरी
उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का मिश्रित मॉडल अपनाना जरूरी होगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि इनडोर कनेक्टिविटी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
इमारतों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी
टीआरएआई के अध्यक्ष ने कहा कि इमारतों के डिजाइन के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में नियामक के सुझावों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है, जिससे भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी.
डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर
लाहोटी ने यह भी बताया कि मशीन-टू-मशीन कम्युनिकेशन को मजबूत बनाने के लिए भी कई सुझाव दिए गए हैं. इसका उद्देश्य देश के डिजिटल इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि तकनीकी विकास को नई गति मिल सके.
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