Eye Care Tips: आजकल मोबाइल-लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे में आंखों की रोशनी बचाए रखने के लिए कुछ आसान आदतों को रोजाना अपनाना बहुत जरूरी है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं को हर साल आंखों का पूरा चेकअप कराना चाहिए, चाहे उन्हें कोई दिक्कत न भी हो.
सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. महिपाल सिंह सचदेव के मुताबिक, अगर किसी को डायबिटीज, हाई बीपी है या परिवार में ग्लूकोमा जैसी बीमारी रही है, तो आंखों की जांच और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है.
बच्चों में भी इन लक्षणों पर ध्यान दें – बार-बार सिरदर्द, पढ़ने में दिक्कत, आंखें मलना, सिकोड़कर देखना या क्लास में बोर्ड साफ न दिखना. ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत डॉक्टर से मिलें. साथ ही खेलते समय या फैक्ट्री, लैब में केमिकल के साथ काम करते वक्त प्रोटेक्टिव चश्मा जरूर पहनें.
20-20-20 नियम क्या है?
जो लोग घंटों स्क्रीन पर काम करते हैं, उनके लिए 20-20-20 नियम काफी फायदेमंद है. इस नियम के तहत हर 20 मिनट में 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें. इससे डिजिटल आई स्ट्रेन कम होता है.इसके अलावा पर्याप्त रोशनी में काम करना, स्क्रीन को सही दूरी पर रखना, बार-बार पलकें झपकाना और 7-8 घंटे की पूरी नींद लेना भी आंखों को हेल्दी रखता है.
कौन सी बीमारियां चुपचाप रोशनी छीन लेती हैं?
अंधापन हमेशा बड़ी बीमारी से शुरू नहीं होता. मोतियाबिंद, काला मोतिया (ग्लूकोमा), डायबिटिक रेटिनोपैथी, नजर का नंबर बढ़ना, कॉर्निया और रेटिना की बीमारियां धीरे-धीरे नजर कमजोर कर देती हैं.
मोतियाबिंद पूरी दुनिया में अंधेपन की सबसे बड़ी वजह है, लेकिन इसका इलाज संभव है. वहीं ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी बिना लक्षण के बढ़ती है. ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को डैमेज करके हमेशा के लिए रोशनी छीन सकता है, जबकि डायबिटीज रेटिना की नसों को नुकसान पहुंचाती है. इसलिए समय पर जांच ही बचाव है.
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