कैदी को कितनी बार मिलती है पैरोल? क्या हैं नियम और शर्तें?

Parole rules: पैरोल का मतलब है किसी कैदी को कुछ समय के लिए जेल से अस्थायी राहत देना है. यह पूरी रिहाई नहीं होती, बल्कि तय समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति होती है. पैरोल के दौरान कैदी कानूनी रूप से दोषी ही माना जाता है और उसे तय अवधि पूरी होने के बाद वापस जेल लौटना पड़ता है. पेरोल एक तरह की अस्थायी रिहाई है, जो मानवीय और सामाजिक कारणों से दी जाती है. 

पैरोल कब दी जाती है?
  1. -पारिवारिक कारण किसी करीबी रिश्तेदार की मृत्यु परिवार में गंभीर बीमारी शादी या अन्य महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन
  2. -स्वास्थ्य कारण कैदी की खुद की गंभीर बीमारी बेहतर इलाज की जरूरत
  3. -सामाजिक पुनर्वास कैदी को समाज में दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया मानसिक संतुलन बनाए रखना
  4. -विशेष परिस्थितियाँ अदालत या सरकार द्वारा विशेष अनुमति त्योहारों या मानवीय आधार पर राहत
उम्रकैद के कैदी को कितनी बार मिल सकती है पैरोल?

कैदी एक बार में आमतौर पर 30 से 40 दिनों की पैरोल ले सकता है, और पूरे साल में अधिकतम 90 से 120 दिनों तक ही पैरोल पर जेल से बाहर रहने की अनुमति होती है.

कितनी तरह की होती है पैरोल?

कस्टडी पैरोल- यह बहुत कम समय के लिए दी जाती है. आमतौर पर किसी करीबी रिश्तेदार की मौत या अंतिम संस्कार जैसे मामलों में दी जाती है. इस दौरान कैदी पूरी तरह से पुलिस की हिरासत (सुरक्षा घेरे) में रहता है.

रेगुलर पैरोल- यह लंबी अवधि के लिए दी जाती है. जो कैदी कम से कम 1 साल की सजा पूरी कर ली है और जिनका जेल में व्यवहार बहुत अच्छा रहा है. आमतौर पर 30 दिन तक की पैरोल मिलती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाया भी जा सकता है. 

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