Students Data at Risk: डिजिटल दुनिया में आज प्राइवेसी लोगों की सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है. माना जाता है कि आज डेटा ही सबसे बड़ी ताकत है. जिसके पास जितना डेटा वह उतना ताकतवर. इतना ही नहीं, आज के समय में साइबर फ्रॉड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है. डेटा की मदद से साइबर हमलावर लोगों की निजी जानकारी चुरा लेते हैं और कई बार लोगों को ठगी का शिकार बनना पड़ता है.
लापरवाही के प्रमुख कारण और खतरे
- बिना अनुमति फोटो/वीडियो साझा करना: स्कूल सोशल मीडिया पर बच्चों की सफलता, वार्षिक दिवस (Annual Day) या कक्षाओं की तस्वीरें बिना माता-पिता की लिखित सहमति के पोस्ट कर देते हैं.
- साइबर बुलिंग और मॉर्फिंग: एक बार बच्चों की तस्वीरें सार्वजनिक होने के बाद, उनका दुरुपयोग मॉर्फिंग, फर्जी आईडी बनाने और ऑनलाइन उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है.
- DPDP Act 2023 का उल्लंघन: भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा संवेदनशील माना जाता है और इसे प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की सत्यापित सहमति अनिवार्य है. कई संस्थान इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं.
- थर्ड-पार्टी ऐप्स और कमजोर सुरक्षा: ऑनलाइन अटेंडेंस, फीस पेमेंट और ई-लर्निंग ऐप्स के जरिए छात्रों का भारी डेटा इकट्ठा किया जाता है। इन प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा के कड़े इंतजाम न होने से डेटा लीक का खतरा बना रहता है.
इसे भी पढ़ें:-सीएम योगी आज सहारनपुर में स्कूल चलो अभियान का करेंगे शुभारंभ