UP News: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में सोमवार को कई कंपनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतर आए. पिछले तीन से चार दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन ने सोमवार को उग्र रूप ले लिया, जब गुस्साए कर्मचारियों ने कई प्रमुख सड़कों पर जाम लगा दिया और यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया. फेज 2 में चल रहे प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया. प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया. आक्रोशित भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़े.
पत्थरबाजी के साथ गाड़ियों में तोड़फोड़
नोएडा में लगातार चौथे दिन भी कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है. कंपनी के कर्मचारियों ने हिंसक रूप दिखाते हुए सोमवार को गाड़ियों में आग लगा दी. साथ ही संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचाया है. इस दौरान नाराज कर्मचारियों ने जमकर पत्थरबाजी भी की. कंपनी के बड़ी संख्या में कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी की अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हुए थे. स्थिति को काबू में करने के लिए यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
नाराज कर्मचारियों ने कार में लगाई आग
कंपनी के मैनेजमेंट से नाराज कर्मचारियों ने वाहनों में तोड़फोड़ के बाद एक कार में आग लगा दी. काले रंग की कार धू-धू कर जलने लगी. इससे वहां पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया. कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी तैनात है.
वेतन वृद्धि को लेकर प्रदर्शन
नोएडा के फेस-2 में मौजूद होजरी कॉम्प्लेक्स में करीब 100 से अधिक कंपनियां चलती हैं. यहीं, ईकोटेक थर्ड के औद्योगिक विहार क्षेत्र में भी 100 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं. इन दोनों जगहों से बड़ी संख्या में मजदूर इस प्रदर्शन में शामिल हुए. कुल मिलाकर इन दोनों क्षेत्रों में 500 से अधिक कंपनियों के कर्मचारी किसी न किसी रूप में इस आंदोलन से जुड़े बताए जा रहे हैं.
क्या है मांगें?
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं. उनकी मुख्य मांग है कि न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए, ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से मिले, काम के घंटे तय हों और अतिरिक्त काम का दबाव न हो. हर सप्ताह एक दिन का अवकाश सुनिश्चित किया जाए, वेतन समय पर बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो.
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें मौजूदा समय में बहुत कम वेतन मिल रहा है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है. कई कर्मचारियों को प्रतिदिन 500 से 700 रुपये तक ही मजदूरी मिलती है. इसके अलावा 10-12 घंटे तक काम कराया जाता है, ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं होता और छुट्टी व बोनस जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं. इन समस्याओं के कारण मजदूरों का गुस्सा लगातार बढ़ता गया और आखिरकार प्रदर्शन उग्र हो गया.
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