Religion: दीवाली से पहले पड़ने वाला धनतेरस का त्योहार धन, सुख और समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है, इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुबेर देव को धन का रक्षक माना जाता है, यही वजह है कि धनतेरस पर कई लोग घर और दुकान में कुबेर यंत्र स्थापित करते हैं, हालांकि, सिर्फ यंत्र रखना ही, बल्कि उसकी सही दिशा और नियमित पूजा का भी ध्यान रखना भी जरूरी होता है, ऐसे में चलिए जानते है कि कुबेर यंत्र क्या होता है, इसे कहां रखना चाहिए और किस तरह एक्टिवेट किया जाता है।
क्या होता है कुबेर यंत्र और क्या है इसका महत्व
बता दें कि कुबेर यंत्र एक खास ज्यामितीय आकृति वाला यंत्र होता है, धार्मिक मान्यता है कि इसे घर या दुकान की तिजोरी में रखने और नियमित पूजा करने से धन की रक्षा होती है, माना जाता है कि कुबेर यंत्र की पूजा से घर में सुख-समृद्धिधि बनी रहती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है।
मान्यता के मुताबिक, यह यंत्र व्यक्ति को आर्थिक मामलों में सकारात्मक सोच रखने और सही फैसले लेने की प्रेरणा भी देता है. इसलिए इसे ऐसी जगह रखने की सलाह दी जाती है जहां धन रखा जाता हो, हालांकि, ये सभी लाभ धार्मिकि आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।
घर या दुकान में किस दिशा में रखें कुबेर यंत्र
माना जाता है कि कुबेर यंत्र को घर या दुकान में स्थापित करना शुभ माना जाता है, इसे बुधवार या किसी शुभ मुहूर्त में रखा जा सकता है, वास्तु मान्यता के अनुसार, इसे उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए, यंत्र का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है, यंत्र की पूजा करते समय व्यक्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, इसके साथ हरे रंग के वस्त्र रखने और कुछ धन अर्पित करने की भी परंपरा बताई गई है. पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। ‘ॐ श्री कुबेराय नमः’
कैसे करें एक्टिवेट कैसे करें कुबेर यंत्र
कुबेर यंत्र की नियमित साफ-सफाई और पूजा का ध्यान रखना चाहिए, इस पर धूल-मिट्टी जमा न होने दें, रोजाना इसे साफ करके धूप दिखाएं और श्रद्धा के साथ मंत्र का जाप करें, यंत्र को तिजोरी या उस स्थान पर रखा जा सकता है, जहां घर का धन और कीमती सामान रखा जाता है, धार्मिक मान्यता के अनुसार, नियमित पूजा और मंत्र जाप से कुबेर देव की कृपा प्राप्त होती है, धनतेरस के दिन यंत्र स्थापित करने से पहले पूजा की जगह को साफ करें और विधि-विधान से पूजा करें।