Dangerous weapon: युद्ध सिर्फ ताकत से नहीं जीते जाते, बल्कि इसमें दिमाग, रणनीति और सही हथियारों की बहुत बड़ी भूमिका होती है. कई बार एक ही हथियार पूरे युद्ध का नतीजा बदल देता है. इतिहास में कुछ ऐसे हथियार बने हैं, जो अपने समय में बेहद खतरनाक और अनोखे थे. इन हथियारों ने न सिर्फ युद्ध जीते, बल्कि देशों और दुनिया की दिशा भी बदल दी. दुनिया में ऐसे 8 खतरनाक हथियार हैं, जो जंग के मैदान में दुश्मन के परखच्चे उड़ाने का मद्दा रखते हैं.
एसी-130 एरियल गनशिप
साल 1884 में हिराम मैक्सिम ने दुनिया की पहली पूरी तरह ऑटोमैटिक मशीन गन बनाई, जिसे मैक्सिम गन कहा गया. यह गन एक मिनट में करीब 600 गोलियां चला सकती थी. पहले विश्व युद्ध में इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल हुआ. इस गन की वजह से बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए और ट्रेंच यानी खाइयों में लड़ाई शुरू हुई.
सबसे पहले नंबर एसी-130 एरियल गनशिप (AC-130 aerial gunship) आता है. ये वो हथियार है जिसे पहली बार वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस्तेमाल किया. ये हथियार ये गोलियों के साथ-साथ आग भी उगलता है. इसके साथ ये मिसाइल दागने के साथ-साथ बम भी बरसाता है. ये हथियार हवा से जमीन और हवा से हवा में मार करने वाला जबर्दस्त हथियार है.
राइफल और मिनी बॉल
पुरानी बंदूकों के मुकाबले राइफल ज्यादा दूर और सटीक निशाना लगाती थी. मिनी बॉल नाम की गोली ने राइफल को और खतरनाक बना दिया. अमेरिकी गृह युद्ध और पहले विश्व युद्ध में स्प्रिंगफील्ड, ली-एनफील्ड और मौजर जैसी राइफलें खूब इस्तेमाल हुईं. इन हथियारों से युद्ध में मौतों की संख्या काफी बढ़ गई.
परमाणु बम
परमाणु हथियार दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार माने जाते हैं. दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए. इन धमाकों में करीब 2 लाख लोगों की मौत हुई. परमाणु बम की ताकत इतनी ज्यादा होती है कि एक पूरा शहर कुछ सेकंड में खत्म हो सकता है. जानकारी के मुताबिक मौजूदा वक्त में दुनिया के केवल 9 देशों के पास परमाणु हथियार है. इस लिस्ट में अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, यूके, फ्रांस, इजरायल और नॉर्थ कोरिया. रूस के पास सबसे ज्यादा 5459 परमाणु हथियार है. दूसरे नंबर पर अमेरिका है, जिसके पास 5277 परमाणु हथियार है. वहीं भारत के पास 180 न्यूक्लियर वेपन है.
लेजर गाइडेड बम
इसका इस्तेमाल इराक युद्ध में किया गया था. इसे मिसाइल भी कह सकते हैं क्योंकि ये मिसाइल की तरह ही ठीक अपने निशाने पर पहुंचती है. इसकी खास बात ये है कि पहले ये लेजर से अपने दुश्मन को फोकस करता है उसके बाद बम छोड़ देता है. ये बम इतना सटीक है कि आसपास की दूसरी जगहों को खास नुकसान नहीं पहुंचता.
जैविक हथियार
जैविक हथियार ऐसे हथियार होते हैं, जिनमें बीमारियां फैलाने वाले कीटाणु, वायरस या ज़हर का इस्तेमाल होता है. पुराने समय में पानी को गंदा करके दुश्मन को बीमार किया जाता था. आज के समय में एंथ्रेक्स और प्लेग जैसे कीटाणु इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जो बहुत खतरनाक होते हैं.
शॉक कैवेलरी
मध्यकाल में घुड़सवार सेना बहुत ताकतवर मानी जाती थी. तेज दौड़ते घोड़ों पर सवार सैनिक सीधे दुश्मन पर हमला करते थे. इससे दुश्मन की लाइनें टूट जाती थीं और अफरा-तफरी मच जाती थी. कई बड़े युद्धों में इस रणनीति ने जीत दिलाई. इन हथियारों ने युद्ध को और ज्यादा खतरनाक बना दिया और इतिहास में गहरी छाप छोड़ी. आज भी दुनिया इनसे मिले सबक को याद रखती है.
हैएंटी पर्सनल माइंस
इसके इस्तेमाल पर दुनियाभर के देशों में रोक है. ये वो हथियार है जिसके करीब आते ही दुश्मन मौत के मुंह में चला जाता है. आम भाषा में कहें तो ये एक छिपा हुआ बम है जो वक्त पर अपना काम करता है. इससे होने वाली तबाही का पैमाना इतना ज्यादा है कि इसके इस्तेमाल की मनाही है.ये वो हथियार हैं जिनका इस्तेमाल आज दुनियाभर की नेवी, आर्मी और एयरफोर्स कर रही हैं.
मोबाइल लेजर प्रणाली
रूस पेरेस्वेत (Peresvet) लेजर हथियार का उपयोग करता है, जो एक मोबाइल लेजर प्रणाली है जिसे पहली बार 1 मार्च 2018 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रूसी संसद में वार्षिक संबोधन में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया था. एयर डिफेंस और संभावित रूप से उपग्रह-रोधी हथियार के लिए डिजाइन की गई पेरेस्वेत बताती है कि रूस भविष्य में लेजर तकनीक को लेकर कितना सतर्क है.
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