सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह कैसे बना शुक्र, सूरज से भी दूर और कभी था इस पर पानी

Interesting information: सौरमंडल में सबसे गर्म ग्रहों का नाम सुनते अक्सर सूरज के सबसे करीब बुध का आता है। लेकिन हकीकत अलग है। शुक्र की सतह का औसत तापमान करीब 464 डिग्री सेल्सियस रहता है और बुध पर दिन और रात के तापमान में बहुत बड़ा अंतर होता है। सूरज की ओर वाले बुध के हिस्से का तापमान करीब 430 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन रात में यह करीब माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। बता दे कि शुक्र पर तापमान इतना ज्यादा और लगातार बना रहने की मुख्य वजह उसका घना वायुमंडल और मजबूत ग्रीनहाउस प्रभाव है।

शुक्र का ग्रीनहाउस कैसे बना इतना खतरनाक

सूरज की गर्मी शुक्र की सतह को गर्म करती है। इसके बाद सतह इन्फ्रारेड विकिरण के रूप में ऊर्जा बाहर छोड़ती है। वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैसें इस ऊर्जा का कुछ हिस्सा सोख लेती हैं और गर्मी को अंतरिक्ष में जाने से रोकते हैं। पृथ्वी पर भी यह प्रक्रिया होती है और जीवन के लिए जरूरी है। लेकिन शुक्र पर यही प्रक्रिया बहुत ज्यादा बढ़ गई। शुरुआती समय में सूरज आज की तुलना में करीब 30 फीसदी कम चमकीला था। इसके बावजूद समय के साथ शुक्र पर तापमान बढ़ा और पानी बड़ी मात्रा में वाष्प बनकर वायुमंडल में पहुंचने लगा।

शुक्र पर कभी पानी और महासागर थे

वैज्ञानिकों के मुताबिक करीब 4.5 अरब साल पहले सौरमंडल के बनने के शुरुआती दौर में शुक्र आज जैसा सूखा और बेहद गर्म ग्रह नहीं था। वहां बड़ी मात्रा में पानी और संभवतः महासागर भी रहे होंगे। लेकिन सूरज की बढ़ती चमक के कारण शुक्र का पानी धीरे-धीरे वाष्पित होने लगा। सतह पर पानी कम होने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड को महासागरों में घुलने या चट्टानों में जमा होने का मौका भी घट गया। इससे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में जमा होती गई। कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने से तापमान और बढ़ा और इसने पानी के और ज्यादा वाष्पीकरण को बढ़ावा दिया। इस तरह गर्मी बढ़ने का एक चक्र बन गया।

आज शुक्र का वायुमंडल कितना अलग

शुक्र के वायुमंडल में करीब आज 96 फीसदी कार्बन डाइऑक्साइड है। इसका वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की सतह के दबाव से 90 गुना से अधिक है। इतना ज्यादा दबाव बेहद कठिन परिस्थितियां पैदा करता है। वहां का तापमान इतना अधिक है कि सीसा जैसी धातु भी पिघल सकती है। यही कारण है कि शुक्र की सतह सौरमंडल के सबसे कठोर ग्रहों में गिनी जाती है। यहां सवाल सिर्फ गर्मी का नहीं, बल्कि उस घने वायुमंडल का भी है, जिसने ग्रह की सतह से गर्मी निकलने की प्रक्रिया को बेहद सीमित कर दिया है।

क्या शुक्र पृथ्वी के लिए जलवायु बदलाव की चेतावनी

पृथ्वी और शुक्र की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं और पृथ्वी का तापमान मानव जीवनकाल में शुक्र की तरह 464 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना संभव नहीं माना जाता। फिर भी शुक्र वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी देता है। पृथ्वी पर भी ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है। शुक्र का उदाहरण बताता है कि वायुमंडल में बदलाव ग्रह के तापमान और रहने योग्य परिस्थितियों पर कितना बड़ा असर डाल सकता है। इसलिए शुक्र केवल सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह नहीं है, बल्कि यह समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है कि जलवायु का संतुलन बिगड़ने पर किसी ग्रह की परिस्थितियां किस तरह बदल सकती हैं।

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