लोग ड्रिंक से पहले ‘चीयर्स’ क्यों कहते हैं? जानिए इसके पीछे का रोचक किस्सा

Cheers history: चाहे कॉफी का कप हो या बीयर का गिलास, जब हम अपने बगल में किसी के साथ पीते हैं, तो हमारे मुंह से “चीयर्स” शब्द निकलना लाजिमी है. यह उन चीजों में से एक है जो हम सभी करते हैं और पिछले कुछ सालों में यह एक तरह की आदत बनी हुई है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जाम टकराने से पहले यही शब्द क्यों कहा जाता है? क्या यह सिर्फ खुशी जताने का तरीका है या इसके पीछे कोई गहरी कहानी छिपी है? इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि चीयर्स सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. आइए जानें.

जश्न मनाने का शानदार तरीका

दरअसल चीयर्स शब्द एक फ्रांसीसी शब्द है. इसका अर्थ होता है ‘चेहरा या सिर’. पुराने समय में टीयर्स बोलना उत्सुकता और प्रोत्साहन का प्रतीक था. चीयर्स अपनी खुशी को जाहिर करने और जश्न मनाने का शानदार तरीका है. इसका मतलब है कि अच्छा समय अब शुरू हो चुका है.

चियर्स करने का इतिहास

18 वीं शताब्दी में चियर्स शब्द का इस्तेमाल खुशी जाहिर करने के लिए किया जाता था. समय बीतने के साथ ही एक्साइटमेंट जाहिर करने के लिए इस शब्द का उपयोग किया जाने लगा. कुछ रिपोर्ट्स में इससे अलग बातें भी बताई गई हैं. कहा जाता है कि जर्मन रिवाजों में अगर गिलास टकराते हैं तो एविल या घोस्ट शराब (alcohol) से दूर रहते हैं इसलिए लोग शराब पीने से पहले एविल को दूर रखने के लिए चीयर्स शब्द का इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि इस तरह चियर्स करने से पांच इंद्रियों का यूज होता है और शराब पीने का एहसास और भी ज्यादा खुशनुमा हो जाता है.

  1. सुरक्षा
    पुराने जमाने में जहर देकर हत्या आम थी. लोग गिलास जोर से टकराते और ‘चीयर्स’ चिल्लाते, ताकि दोनों गिलासों का पेय आपस में मिल जाए. इससे यह यकीन हो जाता था कि ड्रिंक में कोई जहर नहीं है, क्योंकि दोनों एक-दूसरे का पेय पी रहे हैं. यह रिवाज उस वक्त की सतर्कता को दिखाता है, जो आज भी जाम टकराने में जिंदा है.
  2. पांचों इंद्रियों का इस्तेमाल
    इंसान के पास 5 ज्ञानेंद्रियां होती हैं, जिसमें आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा शामिल है. ऐसे में आप ड्रिंक को देख सकते हैं, छू सकते हैं, जीभ से उसका स्वाद ले सकते हैं, सूंघ सकते हैं. लेकिन पांचवीं इंद्री सुनने को शामिल करने के लिए गिलास टकराने की आवाज और ‘चीयर्स’ की पुकार जरूरी थी. यह हर ड्रिंक को एक बेहतरीन अनुभव में बदल देता है.
  3. भूत भगाना
    मध्यकाल में लोग मानते थे कि जोर से गिलास टकराने और ‘चीयर्स’ चिल्लाने से बुरी आत्माएं भाग जाती हैं. कुछ लोग गिलास टकराकर थोड़ा पेय जमीन पर गिराते थे, ताकि बुरी आत्माएं उसे पीकर चली जाएं. यह अंधविश्वास आज भले ही मजेदार लगे, लेकिन उस वक्त यह गंभीर रिवाज था.
  4. भगवान को चढ़ावा
    इंटरनेशनल हैंडबुक ऑफ अल्कोहल एंड कल्चर के मुताबिक, ‘चीयर्स’ कहकर जाम टकराना पुराने समय की बलि प्रथा से जुड़ा है. लोग शराब या खून भगवान को चढ़ाते थे, ताकि उनकी मन्नत पूरी हो. ‘चीयर्स’ का मतलब था ‘लंबी उम्र’ या ‘सेहत के लिए’. यह प्रथा आज ‘टोस्ट’ के रूप में जिंदा है, जहां लोग अच्छी जिंदगी की कामना करते हैं.

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