1st April: सरकार 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रही है. पुराना सिस्टम हटाकर नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा. जिससे नौकरीपेशा लोगों की सैलरी और कंपनी से मिलने वाले फायदों पर टैक्स कैसे लगेगा. ड्राफ्ट रूल्स में सैलरी, घर, गाड़ी और दूसरे अलाउंस की वैल्यू तय करने का फिक्स फॉर्मूला रखा गया है.
नियमों को किया गया आसान
सरकार ने ड्राफ्ट नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कुल नियमों की संख्या 511 से घटाकर 333 कर दी है. इससे टैक्स से जुड़े प्रावधान कम जटिल होंगे और आम लोगों को उन्हें समझने में आसानी होगी. नए सिस्टम में कई चीजों के लिए तय फॉर्मूला लागू किया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति कम होगी.
सैलरी और कंपनी बेनिफिट्स पर असर
अब कंपनी की ओर से मिलने वाले लाभ जैसे घर, गाड़ी, फ्री मील, गिफ्ट्स और एजुकेशन अलाउंस को एक निश्चित वैल्यू के आधार पर टैक्स में जोड़ा जाएगा. इससे कर्मचारियों को पहले की तुलना में साफ और तय नियमों के तहत टैक्स देना होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.
कंपनी के घर पर टैक्स का नया तरीका
यदि किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से घर मिलता है, तो अब उस पर टैक्स शहर की आबादी के आधार पर लगेगा. बड़े शहरों (40 लाख से अधिक आबादी) में सैलरी का 10%, मध्यम शहरों (15 से 40 लाख) में 7.5% और छोटे शहरों में 5% टैक्स देना होगा. पहले यह दर 15% तक थी, इसलिए नए नियम से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.
गाड़ी और ड्राइवर सुविधा पर बदलाव
कंपनी की गाड़ी और ड्राइवर सुविधा के लिए भी नए टैक्स नियम तय किए गए हैं. 1.6 लीटर तक की गाड़ी पर ₹5,000 प्रति माह और इससे बड़ी गाड़ी पर ₹7,000 प्रति माह टैक्स लगेगा. वहीं ड्राइवर सुविधा के लिए ₹3,000 प्रति माह जोड़ा जाएगा. इससे इन सुविधाओं का टैक्स निर्धारण स्पष्ट हो जाएगा.
फ्री मील और गिफ्ट्स में बढ़ी छूट
ऑफिस में मिलने वाले खाने और गिफ्ट्स पर भी राहत दी गई है. अब प्रति मील ₹200 तक का खर्च टैक्स-फ्री रहेगा, जो पहले ₹50 था. इसके अलावा गिफ्ट्स और वाउचर की सीमा बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है. इससे कर्मचारियों को छोटे लाभों पर टैक्स की चिंता कम होगी.
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च में राहत
नए नियमों में बच्चों की शिक्षा से जुड़े अलाउंस में भी बढ़ोतरी की गई है. एजुकेशन अलाउंस ₹3,000 प्रति बच्चा प्रति माह और हॉस्टल अलाउंस ₹9,000 प्रति माह तक टैक्स-फ्री रहेगा. इससे परिवार वाले कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी.
लोन और किराए के मकान पर नए नियम
जरूरत या इलाज के लिए ₹2 लाख तक का ब्याज-मुक्त लोन टैक्स-फ्री रहेगा. वहीं किराए के मकान में रहने वालों को मकान मालिक के साथ अपना संबंध बताना होगा और सालाना किराया कम से कम ₹1 लाख होना चाहिए. इससे नियमों में पारदर्शिता आएगी.
क्या होगा कुल असर?
इन बदलावों के बाद इनकम टैक्स सिस्टम पहले से ज्यादा सरल और व्यवस्थित होने की उम्मीद है. कई मामलों में टैक्स का बोझ कम हो सकता है, जिससे कर्मचारियों की बचत बढ़ेगी. साथ ही तय नियमों के कारण टैक्स की गणना करना आसान हो जाएगा और विवाद की संभावनाएं भी कम होंगी.
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