Trimbakeshwar shivling: महाराष्ट्र के नासिक शहर में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर से एक बेहद अद्भुत और ऐतिहासिक अमृतकुंड के तल में एक शिवलिंग के दर्शन हुए है. सफाई के दौरान कुंड के तल में मौजूद शिवलिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. इसके बाद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन में भारी उत्साह है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षण कार्य के दौरान शिवलिंग का यह दुर्लभ नजारा सामने आया. जैसे ही कुंड का पानी पूरी तरह खाली हुआ, उसके तल में मौजूद प्राचीन शिवलिंग पूरी तरह से स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा.
65 फीट गहरा यह अमृतकुंड पेशवा कालीन माना जाता है. इस कुंड का धार्मिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि इसी अमृतकुंड के पवित्र जल का उपयोग श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की नियमित पूजा और अभिषेक के लिए किया जाता है.
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक त्र्यंबकेश्वर महादेव का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर नासिक शहर स्थित है. यह मंदिर पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थान माना जाता है. यहां कुशावर्त कुंड नाम का एक पवित्र तालाब भी है. कुशावर्त कुंड का निर्माण श्रीमंत सरदार रावसाहेब पार्नेकर ने करवाया था, जिन्हें इंदौर के फड़णवीस के रूप में जाना जाता था. वहीं वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण श्रीमंत नानासाहेब पेशवा ने 1755 से 1786 के बीच कराया था.
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