काशी में बढ़ा गंगा का जलस्तर, कई घाटों के मंदिर हुए जलमग्न, एनडीआरफ और पुलिस कर रही गश्‍त

Varanasi: काशी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे घाटों की पक्की सीढ़ियां और किनारे स्थित कई छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। तुलसी घाट पर बाढ़ का पानी प्लेटफार्म तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि अब जल्‍द ही घाटों पर गंगा आरती के स्‍थलों में बदलाव की नौबत आ जाएगी। 

अस्सी घाट की मिट्टी धीरे-धीरे गंगा में समाहित हो रही है, जबकि शीतला घाट के नीचे स्थित छोटे मंदिर और विग्रह भी जलमग्न हो चुके हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर का शिखर पानी में डूब गया है।

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा का जलस्तर 60.94 मीटर पर स्थिर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ और जल पुलिस मोटरबोट और नावों के माध्यम से कई घाटों पर निगरानी कर रही है। जल प्रभारी पुलिस सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि लगातार गश्त की जा रही है। लोगों से बैरिकेटिंग के अंदर स्नान करने और गहरे पानी में न जाने की अपील की जा रही है।

इस स्थिति ने काशीवासियों में चिंता बढ़ा दी है। घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है, और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को और सख्त कर दिया है। बाढ़ के कारण कई धार्मिक गतिविधियाँ भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनके दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कई लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और उन्हें आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने राहत कार्यों की योजना बनाई है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

गंगा नदी के किनारे बसे घाटों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए, यह आवश्यक है कि प्रशासन इस समस्या का समाधान शीघ्रता से करे। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इस बाढ़ की स्थिति ने काशी की सांस्कृतिक धरोहर को भी खतरे में डाल दिया है। घाटों पर स्थित मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *