Delhi: केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों पर बड़ा फैसला लेते हुए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया है. यह टास्क फोर्स देश में पारदर्शी, डिजिटल और तकनीकी रूप से सुरक्षित परीक्षा ढांचा तैयार करने पर काम करेगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.
एस. सोमनाथ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक तपन डेका,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेश वी. कामकोटि
अनीता करवाल, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा शामिल रहेंगे.
पीएम मोदी ने अपने X हैंडल पर वीडियो संदेश साझा करते हुए छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए अहम घोषणाएं कीं. पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार लगातार कठोर कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि इस तरह की गड़बड़ियों में शामिल लोग आज जेलों में सड़ रहे हैं, मामलों के त्वरित निपटारे कि लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं और सरकार संसद में और अधिक कठोर सजा के प्रावधान वाला कानून लाने जा रही है.
नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी उद्यमियों, विचारकों और नीति-निर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी है. उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में एक कोंकणी परिवार में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा बेंगलुरु और धारवाड़ में हुई, जिसके बाद उन्होंने देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की.
साल 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और अपने 5 अन्य सहयोगियो के साथ मिलकर इन्फोसिस की नींव रखी थी. वे 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के सीईओ रहे, जिस दौरान कंपनी ने वैश्विक स्तर पर नया मुकाम भी हासिल किया.
साल 2009 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने उन्होंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया था. इसके अलावा 2016 में उन्होंने भारत सरकार की उस उच्चस्तरीय समिति का भी नेतृत्व किया था, जिससे देश में यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिला.
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