साल में केवल एक दिन के लिए खुलता है ये रहस्यमयी मंदिर, सिर्फ दर्शन मात्र से पूरी होती हैं भक्तों की मनोकामनाएं

Mysterious Temple: सावन का महीना भगवान शिव की उपासन के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. सावन के महीने में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा करते हैं. देश में भगवान शिव का एक ऐसा भी मंदिर है जो सिर्फ साल में एक दिन खुलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में भगवन शिव और नाग देवता के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में आज हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे. 

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में नागचंद्रेश्वर मंदिर है. इस शिव मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं. नाग पंचमी के अवसर पर यह मंदिर चौबीस घंटे के लिए खुलता है. इस एक दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं. यह मंदिर नागों के अधिपति तक्षक नाग को समर्पित है.

नागचंद्रेश्वर मंदिर की खास बातें 

  • उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती और भगवान शिव की दुर्लभ प्रतिमा है. माना जाता है कि नागों के राजा तक्षक आज भी इस मंदिर में अदृश्य रूप में रहते हैं. आपको बता दें कि तक्षक नाग को भगवान शिव ने प्रसन्न होकर अमरत्व और अपने समीप रहने का वरदान दिया था. 
  • तक्षक नाग नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव के ध्यान में लीन रहते हैं. तक्षक नाग के ध्यान में कोई विघ्न न पड़े इसीलिए साल में 364 दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर बंद रहता है और सावन में केवल नागपंचमी के दिन इसे भक्तों के दर्शन के लिए खोला जाता है. 
  • माना जाता है कि इस भव्य मंदिर में जो भगवान शिव की मूर्ति है वो 11 वीं शताब्दी की है. इस मूर्ति को नेपाल से लाया गया था. 
  • साल में एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में नागपंचमी के दिन तीन बार पूजा की जाती है. सबसे पहले पूजा नाग पंचमी के शुरू होते ही रात में 12 बजे( पंचमी तिथि की शुरुआत पर)  होती है. इस पूजा का संचालन महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा किया जाता है और वो मंदिर के कपाटों को भी खोलते हैं.  इसके बाद दोपहर 12 बजे शासकीय स्तर के लोगों के द्वारा पूजा की जाती है. अंतिम पूजा संध्या काल में होती है जिसे मंदिर समिति के पुरोहित करते हैं. 
  • नागचंद्रेश्वर मंदिर का निर्माण कार्य सन् 1050 में परमार राजा भोज के द्वारा करवाया गया था. इसके बाद साल 1732 में सिंधिया राजवंश के राजा राणोजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर के साथ ही नागचंद्रेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था.

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